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बाइस्कोप: महेश भट्ट की इस फिल्म ने खत्म कर दिया दो नए कलाकारों का करियर, अब भी सुपरहिट हैं गाने

Sun, 17 May 2020 09:18 PM IST
प्रतीक्षा राणावत पंकज शुक्ल, मुंबई
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पापा कहते हैं - फोटो : Social Media
हिंदी सिनेमा में दो निर्देशक ऐसे हुए हैं जिन्हें वक्त के साथ खुद को बदल लेने की महारत हासिल रही है। पहले थे 1959 में फिल्म ‘धूल का फूल’ से अपना करियर शुरू करने वाले निर्देशक यश चोपड़ा। और दूसरे हैं, फिल्म ‘मंजिलें और भी हैं’ से साल 1974 में अपना करियर शुरू करने वाले निर्देशक महेश भट्ट। अपनी ही जिंदगी की कहानियों पर आधा दर्जन के करीब फिल्में बना डाली हैं महेश भट्ट ने। एक जमाना बीच में ऐसा भी आया जब वह किसी भी बड़े सुपरस्टार से बड़े सुपरनिर्देशक बने और फिर ऐसा जमाना भी आया जब उनकी फिल्में लगातार लाइन से फ्लॉप होती चली गईं। महेश भट्ट इन दिनों अपनी दूसरी पत्नी की छोटी बेटी आलिया भट्ट के लिए फिल्म ‘सड़क 2’ का निर्देशन कर रहे हैं। निर्देशन में आधिकारिक रूप से उनकी ये वापसी 20 साल बाद हुई है। महेश भट्ट ने 70 के दशक में पांच फिल्में, 80 के दशक में 12 फिल्में और 90 के दशक में 32 फिल्में निर्देशत की थीं। इन्हीं 32 फिल्मों में से एक फिल्म पापा कहते हैं हमारी आज की बाइस्कोप फिल्म है। इस फिल्म के तमाम दिलचस्प किस्से हैं और उससे भी ज्यादा दिलचस्प किस्से हैं इसकी लीड कास्ट यानी जुगल हंसराज और मयूरी कांगो के। आपको शायद ये जानकर हैरानी हो कि फिल्म ‘पापा कहते हैं’ के लेखक मशहूर पत्रकार, साहित्यकार और भारतीय डेली सोप ओपेरा के जनक मनोहर श्याम जोशी हैं।
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मनोहर श्याम जोशी - फोटो : डेमो
मनोहर श्याम जोशी का नाम हिंदी सिनेमा और टेलीविजन में बड़े अदब से लिया जाता है। उन्होंने फिल्मों की पटकथा लिखने की विधा दूसरों को सिखाने की कोशिश भी अपनी एक किताब में की है। ये अलग बात है कि जितने हिट उनके लिखे टीवी सीरियल ‘हम लोग’, ‘बुनियाद’, ‘कक्काजी कहिन’ या ‘मुंगेरी लाल के हसीन सपने’ रहे, उतनी हिट उनकी लिखी फिल्में न हो पाईं। फिल्म लेखन में वह आए भी काफी देर से। मिथुन चक्रवर्ती स्टारर फिल्म ‘भ्रष्टाचार’ उनकी ही लिखी हुई फिल्म है, इस फिल्म को ‘शोले’ जैसी कालजयी फिल्म बनाने वाले निर्देशक रमेश सिप्पी ने निर्देशित किया। ‘भ्रष्टाचार’ के बाद मनोहर श्याम जोशी ने जो फिल्म लिखी थी, वह है, ‘पापा कहते हैं’। इन दोनों फिल्मों के बाद कमल हासन की नजर उन पर पड़ी और उनके काम को ‘अप्पू राजा’ और ‘हे राम’ में काफी तारीफें भी मिलीं। लेखन, संपादन और सृजन का लंबा सिलसिला रखने वाले मनोहर श्याम जोशी की फिल्म ‘पापा कहते हैं’ उस दौर में बनी, जिस दौर में आमिर खान फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ से देश के युवाओं को अपना दीवाना बना रहे थे।
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मयूरी कांगो, जुगल हंसराज - फोटो : Social Media
जुगल हंसराज और मयूरी कांगो की फिल्म ‘पापा कहते हैं’ में पैसा लगा प्लस चैनल के मालिक अमित खन्ना का। ये फिल्म ऐसे साल में रिलीज हुई जिस साल धर्मेश दर्शन की फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ कमाई के मामले में नंबर वन रही। ‘पापा कहते हैं’ का नंबर कमाई के मामले में साल की टॉप 25 फिल्मों में भी नहीं लगा। सनी देओल- सलमान की फिल्म ‘जीत’ उस साल दूसरे नंबर पर रही और इसके बाद बारी आई सनी देओल की ही फिल्म ‘घातक’, नाना पाटेकर की फिल्म ‘अग्निसाक्षी’ और गोविंदा की फिल्म ‘साजन चले ससुराल’ की। अक्षय कुमार की फिल्म ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ और अजय देवगन की फिल्म ‘दिलजले’ भी इसी साल रिलीज हुईं। साल 1996 की सबसे चर्चित फिल्म थी शेखर कपूर की फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ और कमल हासन की फिल्म ‘हिंदुस्तानी’। तो एक तरह से देखा जाए तो हिंदी फिल्म दर्शकों का स्वाद इस दौर में तेजी से बदल रहा था और वह हर सितारे को परख आजमा रहे थे। फिल्म ‘पापा कहते हैं’ का म्यूजिक फिल्म रिलीज से पहले ही सुपरहिट हो चला था और लग रहा था कि महेश भट्ट एक बार फिर अपनी फिल्म ‘हम हैं राही प्यार के’ की कामयाबी बॉक्स ऑफिस पर दोहरा देंगे।

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घर से निकलते ही - फोटो : Social Media
फिल्म ‘पापा कहते हैं’ के गाने लिखे थे जावेद अख्तर ने और फिल्म में संगीत था राजेश रोशन का। जावेद अख्तर ने गाने लिखने के मामले में साल 96 में फिल्म ‘साज’, साल 97 में फिल्म ‘बॉर्डर’ और साल 98 में फिल्म ‘गॉडमदर’ के लिए नेशनल फिल्म अवार्ड जीते। ये हैट्रिक लगाने वाले हिंदी सिनेमा के वह इकलौते गीतकार हैं। इन्हीं जावेद अख्तर ने लिखा फिल्म पापा कहते हैं का कालजयी गाना, ‘घर से निकलते ही, कुछ दूर चलते ही, रस्ते में हैं उसका घर...’ उदित नारायण की जोश भरी आवाज का जादू और संगत राजेश रोशन के दिल को छू जाने वाले संगीत का। इस गाने ने वह कमाल मचाया था कि एक बार तो ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ का संगीत भी इसके आगे फीका पड़ गया। इस गाने के आने से पहले हर म्यूजिक चार्ट पर ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ या फिर ‘मेहंदी लगाके रखना’ ही छाए हुए थे, लेकिन ‘घर से निकलते ही’ की तासीर ही कुछ अलग थी। राजेश रोशन के बारे में कहा जाता था कि वह अपना बेस्ट म्यूजिक अपने भाई राकेश रोशन की फिल्मों के लिए ही रखते हैं लेकिन, राजेश रोशन ने इस गाने के अलावा ‘प्यार में होता है क्या जादू’ में भी अपना बेस्ट देने की कोशिश की। घर से निकलते ही की लोकप्रियता को देखते हुए म्यूजिक कंपनी टी सीरीज ने दो साल पहले इसका रीमिक्स बनाने की कोशिश भी की गायक अरमान मलिक और उनके कंपोजर भाई अमाल मलिक के साथ। लेकिन, ये रीमिक्स पूरी तरह फ्लॉप रहा। न कुणाल वर्मा की कलम जावेद अख्तर के पेन की नोंक छू पाई और न अमाल मलिक को इस गाने की ताजगी रीक्रिएट करने में कामयाबी मिली। आप भी सुनिए ये ओरीजनल गाना और उसके बाद इसका रीमिक्स गाना..

ओरीजनल – घर से निकलते ही...



रीमिक्स – घर से निकलते ही...

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Jugal Hansraj
फिल्म पापा कहते हैं बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी नहीं पा सकी। इसकी वजह से सबसे ज्यादा नुकसान अगर फिल्म के प्रोड्यूसर अमित खन्ना के बाद किसी का हुआ तो वे रहे फिल्म के लीड कलाकार जुगल हंसराज और मयूरी कांगो। जुगल हंसराज की हिंदी सिनेमा में एंट्री बाल कलाकार के तौर पर शेखर कपूर की फिल्म ‘मासूम (1983)’ से हुई थी। फिल्म में अपनी सहकलाकार उर्मिला मातोंडकर के साथ बाद में जुगल ने निर्देशक हामिद खान की फिल्म ‘आ गले लग जा’ भी की। महेश भट्ट ने एक तरह से जुगल हंसराज को फिल्मों में री लॉन्च करने की कोशिश की थी, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। जुगल से उनकी किस्मत तब भी रूठी रही जब उन्हें यशराज फिल्म्स जैसे बैनर की फिल्म ‘मोहब्बतें’ अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय के साथ मिली। ऐश्वर्या राय फिल्म ‘पापा कहते हैं’ के प्रीमियर पर भी पहुंची थीं। जुगल हंसराज और मशहूर निर्माता निर्देशक करण जौहर दरअसल स्कूल के दिनों के साथी हैं। करण की मदद से जुगल को यशराज फिल्म्स की फिल्म ‘रोडसाइड रोमियो’ के निर्देशन में भी हाथ आजामने में मदद मिली लेकिन ये फिल्म भी नहीं चली। उन्होंने एक और फिल्म ‘प्यार इंपॉसिबल’ भी निर्देशित की है। करिश्मा कपूर के टीवी डेब्यू में भी जुगल दिखे और साल 2016 में रिलीज हुई फिल्म ‘कहानी 2’ में भी वह नजर आए। इन दिनों बताते हैं कि वह अमेरिका में अपनी पत्नी जैस्मीन ढिल्लों के साथ रह रहे हैं। पिछली गर्मियों में मनीष मल्होत्रा ने अपने सोशल मीडिया पेज पर जुगल और उनकी पत्नी के साथ उनके बच्चे की फोटो पोस्ट की थी।

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mayuri kango
जुगल हंसराज के जीवन जैसी ही फिल्म ‘पापा कहते हैं’ की कहानी भी बड़ी मिस्ट्री वाली रही। अपनी मां, नानी और दादाजी के साथ रहने वाली स्वीटी एक दिन अपने पिता का पता लगाने घर से निकल जाती है। सेशेल्स पहुंची स्वीटी को उसके पिता मिल भी जाते हैं लेकिन लंबे अरसे तक दोनों को एक दूसरे की पहचान नहीं पता होती। यहीं स्वीटी की मुलाकात रोहित दीक्षित से होती है और दोनों के बीच प्यार पनपता है। फिल्म की कहानी अगर सीधी सादी सी लव स्टोरी होती तो फिल्म काफी अच्छी हो सकती थी लेकिन इसमें बाप बेटी वाला ट्विस्ट और कहानी में बनाया गया अतिरिक्त सस्पेंस इसकी मदद नहीं कर पाता है। फिल्म की कहानी कमजोर होने के चलते महेश भट्ट भी ज्यादा कुछ कर नहीं पाए और सुपरहिट म्यूजिक के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी। सईद अख्तर मिर्जा निर्देशित फिल्म ‘नसीम’ से हिंदी सिनेमा में कैफी आजमी जैसे मशहूर शायर के साथ परदे पर डेब्यू करने वाली मयूरी के लिए फिल्म ‘पापा कहते हैं’ का फ्लॉप होना ऐसा झटका रहा जिससे वह फिर कभी उबर नहीं सकीं। मयूरी कांगो के बारे में साल भर पहले ये जानकारी सामने आई थी कि वह गूगल इंडिया में नौकरी कर रही हैं।

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