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Mulraj Rajda: लेखक, निर्देशक और अभिनेता थे मूलराज राजदा, मां सीता के पिता जनक के किरदार के लिए मिली थी ख्याति

Sun, 13 Nov 2022 07:45 AM IST
शशि सिंह एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मूलराज राजदा - फोटो : insta
सिनेमा की दुनिया में कई ऐसे दिग्गज हुए हैं, जिन्होंने न सिर्फ अपने अभिनय से बल्कि अन्य प्रतिभाओं से भी अपना लोहा मनवाया है। इन्हीं में से एक नाम मूलराज राजदा का है, जिन्होंने शानदार अभिनय से तो लोगों के दिलों को जीता ही इसके साथ ही वह एक बेहतरीन निर्देशक होने के साथ ही बेमिसाल लेखक भी थे। 13 नवंबर को मूलराज राजदा की बर्थ एनिवर्सरी होती है। तो चलिए जानते हैं सिनेमा के इस दिग्गज के बारे में कुछ खास बातें और उनका सिनेमा में क्या रहा योगदान।
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मूलराज राजदा - फोटो : social media

मूलराज राजदा ने हिंदी के साथ ही लंबे समय तक गुजराती फिल्मों, टेलीविजन शो के साथ ही थिएटर में भी काम किया था। उन्हें गुजराती सिनेमा के सबसे बेहतरीन कलाकारों में से एक माना जाता है। अपने पांच दशक से अधिक के करियर में मूलराज राजदा ने 50 से ज्यादा फिल्मों और धारावाहिकों में अभिनेता, लेखक और निर्देशक के रूप में योगदान दिया। 

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रामानंद की रामायण में मूलराज राजदा - फोटो : insta

माता सीता के पिता के रूप में पाई ख्याति
मूलराज राजदा ने कई धार्मिक सीरीयल्स में बेहतरीन किरदार अदा किए थे। उन्होंने धारावाहिक विश्वामित्र में वशिष्ठ का किरदार निभाया था इसके अलावा वह बी आर चोपड़ा की कई अन्य कृतियों में भी दिखाई दिए, जिनमें विक्रम बेताल भी है। वहीं उन्होंने रामानंद सागर की रामायण में माता सीता के पिता महाराजा जनक का किरदार अदा किया था और इस भूमिका से उन्हें काफी ख्याति प्राप्त हुई थी।

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राजा जनक के किरदार में मूलराज राजदा - फोटो : social media
मूलराज राजदा ने टीवी से लेकर फिल्मों तक में दिया उत्कृष्ट योगदान
बात करें लेखन में योगदान की तो मूलराज राजदा (1973) में ताजा खबर, जय शाकंभरी मां (1989), जय श्री स्वामीनारायण (2002) को लिखने के लिए पहचाने गए। इसके अलावा उन्हें जेसल तोरल (1971), नागिन और सुहागिन (1979), अमन लक्ष्मी (1980), रामायण (1987), दिल ही तो है (1992), ब्योमकेश  बख्शी (1993), क्रांतिवीर (1994), विश्वामित्र (1995), लहू के दो रंग (1997), मृत्युदाता (1997), बूंद (2001) और रीत रिवाज (2009) के लिए जाने गए। 
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