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अमेरिका में गाना गाते हुए इस सिंगर की हो गई थी मौत, मरीज को भी अपनी आवाज से कर देते थे ठीक

Sat, 15 May 2021 05:30 AM IST
दीपाली श्रीवास्तव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मुकेश
हिंदी सिनेमा जगत में सिर्फ अभिनेता या अभिनेत्री ही यादगार नहीं हुए हैं बल्कि यहां गुजरे हुए जमाने के गायक भी अपने बेहतरीन गानों के लिए याद किए जाते हैं। आज हम जिस गायक की बात करने जा रहे हैं उन्हें अभिनेता राज कपूर की आवाज कहा जाता था और वो आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करते हैं। आज हम बात कर रहे हैं मशहूर गायक मुकेश के बारे में, जिन्होंने  'दोस्त-दोस्त न रहा', 'जीना यहां मरना यहां', 'कहता है जोकर', 'आवारा हूं' जैसे हिट गाने दिए। मुकेश देश में ही नहीं विदेश में भी मशहूर थे, उनके आवाज को काफी पसंद किया गया। लोगों को इस बात की खुशी रही कि वो अपना पसंदीदा गाना गाते हुए इस दुनिया को अलविदा कह गए। तो आज हम आपको गायक मुकेश से जुड़ी खास बातें बताने जा रहे हैं। 
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मुकेश
मुकेश का जन्म 22 जुलाई 1923 में हुआ था और उनका पूरा नाम मुकेश चंद्र माथुर था। उनके पिता जोरावर चंद्र माथुर पेशे से इंजिनियर थे। मुकेश के 10 भाई-बहन थे और वो छठे नंबर के थे। मुकेश को बचपन से ही गाने में रुचि थी। वो अपने क्लासमेट्स को गाना सुनाया करते थे। मुकेश ने 10वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और पीडब्लूडी में नौकरी करने लगे थे। मुकेश हमेशा से ही फिल्मों में काम करना चाहते थे।
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मुकेश
एक बार मुकेश अपने रिश्तेदार मोतीलाल की बहन की शादी में गाना गा रहे थे। मोतीलाल को मुकेश की आवाज इतनी पसंद आ गई कि वो उन्हें मुंबई लेकर आ गए। मुंबई में मुकेश को उन्होंने गाने की ट्रेनिंग दिलवाई। मुकेश ने 1941 में फिल्म 'निर्दोष' में अभिनय किया और इस फिल्म के सभी गाने भी खुद ही गाए। इसके बाद उन्होंने  'माशूका', 'आह', 'अनुराग' और 'दुल्हन' जैसी फिल्मों में भी बतौर अभिनेता काम किया।

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राज कपूर और मुकेश
मुकेश ने अपने करियर में सबसे पहला गाना 'दिल ही बुझा हुआ हो तो' गाया था। फिल्म-उद्योग में उनका शुरुआती दौर काफी मुश्किलों भरा था। लेकिन एक दिन उनकी आवाज का जादू के.एल. सहगल पर चल गया।  मुकेश का गाना सुनकर सहगल दंग रह गए और उन्होंने मुकेश को गाने का मौका दिया। राज कपूर के लिए एक-दो गाने गाने के बाद ही उन्हें 50 के दशक में 'शोमैन की आवाज' कहा जाने लगा।
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राज कपूर और मुकेश
राज कपूर और मुकेश में काफी अच्छी दोस्ती थी। मुश्किल दौर में राज कपूर और मुकेश हमेशा एक-दूसरे की मदद को तैयार रहते थे। साल 1959 में ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म 'अनाड़ी' ने राज कपूर को पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया। कम ही लोगों को पता होगा कि राज कपूर के जिगरी यार मुकेश को भी अनाड़ी फिल्म के 'सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी' गाने के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था।
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मुकेश
मुकेश ने 40 साल के लंबे करियर में लगभग 200 से अधिक फिल्मों के लिए गाने गाए। मुकेश उस जमाने के हर सुपरस्टार की आवाज बने गए थे। उनकी आवाज का जादू लोगों पर इस कदर था कि एक बार एक लड़की बीमार हो गई और वो अपनी मां से बोली कि अगर मुकेश आकर उसे अपना गाना सुनाएं तो वह ठीक हो सकती है। डॉक्टर से इस बात का पता चलने पर मुकेश तुरंत उस लड़की से मिलने पहुंच गए और गाना सुनाया।
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मुकेश और राज कपूर
उन्होंने हर तरह के गानों में अपनी आवाज दी लेकिन उन्हें दर्द भरे गीतों से ज्यादा पहचान मिली। मुकेश ने 'अगर जिंदा हूं मैं इस तरह से', 'ये मेरा दीवानापन है', 'ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना', 'दोस्त दोस्त न रहा' 'दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई' और 'मेरा जूता है जापानी' जैसे कई गीतों को अपनी आवाज दी। मुकेश फिल्मफेयर पुरस्कार पाने वाले पहले पुरुष गायक थे।
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राज कपूर और मुकेश
27 अगस्त, 1976 को अमेरिका में एक स्टेज शो में मुकेश परफॉर्म कर रहे थे और उस वक्त वो गाना गा रहे थे 'एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल।' इस गाने को गाते हुए उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। राज कपूर को जब उनकी मौत की खबर मिली तो उनके मुंह से आवाज भी नहीं निकली थी। मानो उनकी जिंदगी किसी ने छीन ली हो। एक इंटरव्यू में राज कपूर ने कहा था मुकेश के जाने से मेरी आवाज और आत्मा दोनों चली गई।
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