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Mukesh: सहगल के सुरों में ढले मुकेश ने यूं बनाया गायिकी में सबसे ऊंचा मुकाम, जग में अब भी कायम आखिरी बोल

Sun, 27 Aug 2023 08:54 AM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मुकेश - फोटो : अमर उजाला
हिंदी सिनेमा के महान गायक मुकेश ने अपनी गायकी से देश और दुनिया के फैंस के दिलों में खास जगह बनाई। राज कपूर की आवाज कहे जाने वाले मुकेश आज भी संगीत प्रेमियों के दिल पर राज करते हैं। मुकेश ने राजकपूर के लिए 'दोस्त-दोस्त न रहा', 'जीना यहां मरना यहां', 'कहता है जोकर', 'दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई', 'आवारा हूं' और 'मेरा जूता है जापानी' जैसे मशहूर गाने गाए थे। मुकेश भारत ही नहीं विदेश में भी काफी मशहूर थे। भले ही मुकेश आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गाने आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े रहते हैं और हर पल फैंस उन्हें गुनगुनाते हैं। मुकेश को संगीत के प्रति इतना प्रेम था कि अपना पसंदीदा गाना गाते हुए ही उन्होंने दम तोड़ा था। भारत में जन्मे मुकेश की मौत विदेश में हुई थी। आज मुकेश की पुण्यतिथि है। चलिए इस मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें...
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मुकेश कुमार - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
मुकेश का जन्म 22 जुलाई 1923 में दिल्ली में हुआ था। उनका पूरा नाम मुकेश चंद्र माथुर था। उनके पिता जोरावर चंद्र माथुर पेशे से इंजीनियर थे। मुकेश के 10 भाई-बहन थे और वह छठे नंबर के थे। बचपन से ही मुकेश को गाने का शौक था। वह अपने स्कूल में भी गाना गाते रहते थे और अपने दोस्तों को गाकर सुनाते थे। मुकेश ने 10वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और पीडब्ल्यूडी में नौकरी करने लगे थे। मुकेश फिल्मों में भी काम करना चाहते थे, जिसके बाद एक पल ऐसा आया कि उन्हें इंडस्ट्री में गाने का ब्रेक मिला।

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मुकेश कुमार - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
दरअसल, एक बार मुकेश अपने रिश्तेदार मोतीलाल की बहन की शादी में गाना गा रहे थे। मोतीलाल को मुकेश की आवाज इतनी पसंद आ गई कि वह उन्हें अपने साथ मुंबई लेकर आ गए। मुंबई में मुकेश को उन्होंने गाने की ट्रेनिंग दिलवाई। इसके बाद मुकेश ने 1941 में फिल्म 'निर्दोष' से अपने अभिनय और गायकी की शुरुआत की। अभिनय में साथ इस फिल्म के सभी गाने भी मुकेश ने खुद ही गाए थे। हालांकि, दर्शकों को मुकेश के अभिनय से ज्यादा उनकी आवाज पसंद आई और उन्होंने पहले ही गाने से फैंस का दिल जीत लिया था। इसके बाद उन्होंने  'माशूका', 'आह', 'अनुराग' और 'दुल्हन' जैसी फिल्मों में भी बतौर अभिनेता काम किया।

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राज कपूर, मुकेश कुमार - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
मुकेश ने अपने करियर में सबसे पहला गाना 'दिल ही बुझा हुआ हो तो' गाया था। फिल्म-उद्योग में उनका शुरुआती दौर काफी मुश्किलों भरा था, लेकिन एक दिन उनकी आवाज का जादू के.एल. सहगल पर चल गया।  मुकेश का गाना सुनकर सहगल दंग रह गए और उन्होंने मुकेश को गाने का मौका दिया। राज कपूर के लिए एक-दो गाने गाने के बाद ही उन्हें 50 के दशक में 'शोमैन की आवाज' कहा जाने लगा। मुकेश ने कई सुपरहिट फिल्मों में गाने गाए और मशहूर अभिनेता राज कपूर की आवाज बने, जिसमें 'आवारा', 'मेरा नाम जोकर', 'संगम', 'श्री 420' जैसी फिल्में शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने मनोज कुमार, फिरोज गांधी, सुनील दत्त आदि के लिए भी गाने गाए और लोगों को भी उनकी आवाज खूब पसंद आती थी।

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मुकेश कुमार - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
मुकेश को 'अनाड़ी' फिल्म के 'सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी' गाने के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। मुकेश ने 40 साल के लंबे करियर में लगभग 200 से अधिक फिल्मों के लिए गाने गाए। मुकेश उस जमाने के हर सुपरस्टार की आवाज बने गए थे। उन्होंने हर तरह के गानों में अपनी आवाज दी, लेकिन उन्हें दर्द भरे गीतों से ज्यादा पहचान मिली। मुकेश ने 'अगर जिंदा हूं मैं इस तरह से', 'ये मेरा दीवानापन है', 'ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना', 'दोस्त दोस्त ना रहा', 'दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई' और 'मेरा जूता है जापानी' जैसे कई गाने गाए, जो लोगों के दिल में उतर गए। मुकेश फिल्मफेयर पुरस्कार पाने वाले पहले पुरुष गायक थे।

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मुकेश - फोटो : सोशल मीडिया
अपनी आवाज से लोगों को मंत्र मुग्ध करने वाले मुकेश की मौत सभी के लिए काफी हैरान कर देने वाली थी। दरअसल, वह अमेरिका में एक कॉन्सर्ट में शामिल होने गए थे। लेकिन, जिंदगी ने उन्हें ऐसा धोखा दिया कि शो से पहले ही उनका निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें हार्ट अटैक आया था। 27 अगस्त 1976 को मुकेश इस दुनिया को अलविदा कह गए और अपने पीछे छोड़ गए मधुर आवाज के अनगिनत तराने, जिन्हें गुनगुनाते हुए आज भी लोग मुकेश को याद करते हैं।

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