मि. नटवरलाल, अजय देवगन
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अमिताभ बच्चन ने जब राकेश कुमार से सवाल किया कि फिल्म क्या है, कहानी क्या है, गाने किसके हैं? किसी को कुछ नहीं पता। बस ये पता था कि सब कश्मीर चलेंगे। वहीं गाने शूट करेंगे। वहीं फिल्म की कहानी भी लिख लेंगे। आपको ये जानकर भले झटका लगे कि बिना फिल्म की कहानी के कैसे फिल्म की शूटिंग फिक्स हो सकती है लेकिन सच पूछिए तो सलीम जावेद के हिंदी सिनेमा में बतौर राइटिंग टीम कदम रखने तक शूटिंग से पहले पूरी कंप्लीट स्क्रिप्ट गिनती की ही फिल्मों की तैयार होती थीं। एक मोटा मोटा खाका दिमाग में होता था प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के और तमाम बार तो फिल्म की शूटिंग वाले दिन ही सीन लिखा जाता और उसके संवाद लिखे जाते। मिस्टर नटवरलाल हालांकि है तो उस दौर की फिल्म जब हीरो फिल्म साइन करने से पहले स्क्रिप्ट मांगने लगे थे लेकिन हिंदी सिनेमा में बहुत सारा काम भरोसे पर भी हो जाता है। राकेश कुमार ने बाद में एक और फिल्म अमिताभ बच्चन के साथ इसी भरोसे पर ही बना डाली थी, जिसका नाम है याराना। उसका किस्सा फिर कभी।
खैर तो फिल्म मि. नटवरलाल के लिए अमिताभ बच्चन ऑन बोर्ड हो गए। डायरेक्टर राकेश कुमार भी ऑन बोर्ड हो गए। डायरेक्टर ने अपनी पिछली फिल्म की हीरोइन रेखा को भी हीरो की सिफारिश पर ऑन बोर्ड कर लिया। सबके टिकट बुक हो गए। होटल के कमरे बुक हो गए। शूटिंग के लिए सारे कैमरा, लाइट्स और बाकी उपकरण बुक होकर तय हो गया कि किस दिन कौन सा ट्रक कहां से निकलना है? लेकिन ये नहीं तय हो रहा था कि फिल्म क्या है। निर्देशक ने अब तक फिल्म के कुछ बड़े बड़े सीन सोच लिए थे। फिल्म मेकिंग की भाषा में इन्हें गिमिक्स (टोटके) कहा जाता है। जैसे कि ये दो ऐसे भाइयों की कहानी होगी जिसमें एक पुलिस वाला और एक चोर होगा। चोर पुलिस के इस खेल में अमजद खान जैसा एक खतरनाक विलेन होगा। हीरो की जंगली जानवरों से एक दो खतरनाक फाइट्स होंगी और होंगे कुछ दमदार, मस्ती भरे गाने। फिल्म के स्टंट डायरेक्टर थे वीरू देवगन और फिल्म में उन्होंने कप्तान सिंह का रोल भी किया है। फिल्म की शूटिंग पर अजय देवगन भी गए थे, जिनकी एक खास तस्वीर यहां हम आपके लिए ले आए हैं।