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Nikkita Returns Phalke Award: मुंबई में अवॉर्ड कारोबार की रोचक कहानी, पढ़िए फाल्के पुरस्कारों का कच्चा चिट्ठा

Thu, 02 Mar 2023 12:03 PM IST
ज्योति राघव अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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निकिता घाग - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अंतरराष्ट्रीय मॉडल और अभिनेत्री निकिता घाग ने अपना दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल अवॉर्ड लौटाने का एलान करके मुंबई मनोरंजन जगत में जो हलचल मचाई है, वह थमने का नाम नहीं ले रही। देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय सिनेमा सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से मिलते-जुलते नामों वाले पुरस्कारों का मुंबई में पूरा एक ऐसा सिस्टम बन चुका है, जिसमें भारतीय सिनेमा के दिग्गजों में शुमार दिलीप कुमार से लेकर अमिताभ बच्चन तक शामिल हो चुके हैं। संगीतकार दिलीप सेन इसे दादा साहब फाल्के पुरस्कार को घर-घर पहुंचाने का मिशन मानते हैं तो कुछ आयोजक ऐसे भी हैं जो इस नाम के बूते विदेश तक में अपना कारोबार फैला चुके हैं। आइए आपको बताते हैं कि राष्ट्रीय सिनेमा सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से मिलते जुलते पुरस्कारों की शुरुआत कब और कैसे हुई और अब इस नाम का सहारा लेकर कितने पुरस्कार मुंबई में आयोजित होते हैं...
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रणवीर सिंह-लारा दत्ता-धर्मेंद्र-रानी मुखर्जी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
23 साल पहले हुई शुरुआत
दादा साहब फाल्के के नाम से सबसे पहले दादा साहब फाल्के अकादमी अवॉर्ड की शुरुआत अभिनेता चंद्रशेखर ने साल 2000 में की। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में चंद्रशेखर के पुत्र अशोक शेखर बताते हैं,  'मेरे पिता दादा साहब फाल्के अकादमी अवॉर्ड के संस्थापक थे और इस अवॉर्ड के ट्रस्टी थे जाने माने फिल्म वितरक संतोष सिंह जैन, जो अब नहीं रहे। दूसरे ट्रस्टियों में फिल्मिस्तान स्टूडियो की मालिक मीना जालान, जॉनी लीवर, मिथुन चक्रवर्ती भी शामिल रहे हैं। अब तक यह अवॉर्ड इंडस्ट्री के 90 प्रतिशत लोगों को मिल चुका हैं, जिनमे दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, अनिल कपूर, रानी मुखर्जी, रणवीर सिंह जैसे सितारे शामिल हैं। इस साल भी दादा साहब के जन्मदिन 30 अप्रैल पर ये पुरस्कार आयोजित करने की योजना बन रही है।’
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तत्कालीन राष्ट्रपति से भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड ग्रहण करते हुए बिग बी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फाल्के पुरस्कार नंबर 2
दादा साहब फाल्के के जन्मदिन 30 अप्रैल ही फाल्के अवॉर्ड्स के एक और आयोजन की दावेदारी अशफाक खोपेकर की भी रही है। अशफाक के मुताबिक, 'पहले मैं भी दादा साहब फाल्के अकादमी अवॉर्ड के कमेटी में था। साल 2015 से हमने दादा साहब फाल्के फाउंडेशन के नाम से अपनी एक अलग संस्था बना ली। तब से हम लोग यह अवॉर्ड इसी नाम से हर साल करते आ रहे हैं। इस साल दादा साहब फाल्के के जन्मदिन पर दादा साहब फाल्के फाउंडेशन अवॉर्ड करने की तैयारी जारी है। इस अवॉर्ड समारोह से फिल्म इंडस्ट्री की 35 यूनियन के सदस्य जुड़े हुए हैं। हमारी कमेटी के सदस्य ही तय करते हैं कि अवॉर्ड किसे दिया जाना चाहिए। भारत सरकार की तरफ से मिलने वाला सम्मान तो सबको मिल नहीं सकता, इसलिए हमारी कोशिश यही रहती है कि सिनेमा के क्षेत्र में जिसका योगदान कुछ भी हो उसे सम्मानित किया जाए।'

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दादा साहब फाल्के मेमोरियल फाउंडेशन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फाल्के पुरस्कार नंबर 3
कभी संघर्षरत अभिनेता के तौर पर अपनी पहचान बताने वाले अभिनेता कल्याणजी जाना की कहानी इन सबमें सबसे दिलचस्प है। कहते हैं कि उनका रहन सहन ही इन पुरस्कारों ने बदल दिया है। कल्याणजी ने साल 2019 में दादा साहब फाल्के आइकॉन अवॉर्ड फिल्म इंटरनेशनल की शुरुआत की पिछले साल दिसंबर में इस समारोह का आयोजन दुबई में हुआ जिसमें अंकिता लोखंडे, कीकू शारदा, दर्शन कुमार जैसी फिल्म और टीवी जगत से जुड़ी कई हस्तियों को सम्मानित किया गया। कल्याणजी जाना 15 मार्च को दुबई में ये समारोह फिर से करने की योजना पर काम कर रहे हैं।
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गजेंद्र चौहान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फाल्के पुरस्कार नंबर 4
मुंबई में बंटने वाले फाल्के पुरस्कारों में अगला नाम आता है, लीजेंड दादा साहब फाल्के अवॉर्ड का। इसकी शुरुआत कृष्णा चौहान ने तीन साल पहले ही की है। इसी पुरस्कार को लेकर अभिनेता गजेंद्र चौहान सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा ट्रोल हुए थे। गजेंद्र ने इसे लेकर बाद में खूब सफाई भी दी कि उन्होंने अपने पुरस्कार में इसका पूरा नाम साफ साफ लिखा था। वह अब भी यही कहते हैं कि दादा साहब फाल्के के नाम पर होने वाला कोई भी अवॉर्ड नकली नहीं है।
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दादा साहब फाल्के अकेडमी अवॉर्ड - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फाल्के पुरस्कार नंबर 5
मुंबई में दादा साहब फाल्के के नाम पर होने वाले पुरस्कारों में दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड्स का रुतबा सबसे अलग रहता है। ये पुरस्कार फाइव स्टार होटल में आयोजित होता है। इसे तमाम राज्य सरकारों की तरफ से आर्थिक मदद भी मिलती है। हालांकि ये बस कहने को ही फिल्म फेस्टिवल अवार्ड्स हैं क्योंकि इस पूरे आयोजन में एक भी फिल्म की न तो स्क्रीनिंग होती है और न ही कभी इसकी किसी जूरी का नाम सामने आया। समारोह आयोजक अनिल मिश्रा कहते हैं, 'हमने इस अवॉर्ड का  गठन साल 2012 में किया था। इस अवॉर्ड के माध्यम से  सिनेमा जगत से जुड़े लोगों को सम्मानित तो किया ही जाता है, इसके अलावा अगर देश की सेवा में किसी का विशेष योगदान रहा हो तो उन्हें भी सम्मानित किया जाता है।’
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दादा साहब फाल्के अवॉर्ड - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फाल्के पुरस्कार नंबर 6
दादा साहब फाल्के के नाम से मुंबई के गली कूचों में और भी तमाम पुरस्कार होते रहते हैं। इनमें से एक का तो नाम ही चौंकाने वाला है, सरस्वती बाई दादा साहब फाल्के नेशनल अवॉर्ड। इस पुरस्कार के आयोजक अंजन गोस्वामी कहते हैं, 'ऐसे पुरस्कार से अगर किसी को भी सम्मानित किया जाता है, तो इसमें कोई बुराई क्या है?' हालांकि कानून के जानकार मानते हैं कि किसी संस्था या पुरस्कार में नेशनल जैसे शब्द जोड़ना सही नहीं है। इससे पुरस्कार के सरकारी होने का भ्रम उत्पन्न होता है। शैक्षिक संस्थाओं में नेशनल शब्द जोड़ने पर पहले ही रोक लग चुकी है।
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सायरा बानो-दिलीप कुमार-अमिताभ बच्चन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आयोजकों में आपसी तनातनी
दादा साहब फाल्के अकादमी अवॉर्ड के आयोजक अशोक शेखर कहते हैं, ‘हमने दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन जैसी शख्सियतों को एक साथ दादा साहब फाल्के अकादमी अवॉर्ड से सम्मानित किया लेकिन कुछ ऐसे आयोजक दादा साहब फाल्के के नाम पर अवॉर्ड कर रहे हैं, जिनका इंडस्ट्री से कोई लेना देना नहीं है। अभी अनिल मिश्रा ने दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड का आयोजन किया जिसमें बॉलीवुड की कई नामी हस्तियों को अवॉर्ड मिला। उन्हें अवार्ड कार्यक्रम के प्रायोजक से दिलवाया गया।’
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सुनील पाल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सुनील पाल की खरी बात
हास्य कलाकार सुनील पाल कहते हैं, 'दादा साहब फाल्के के नाम पर मुंबई में रेवड़ियों की तरह अवॉर्ड बांटे जा रहे हैं, इस तरह से सिनेमा के सबसे बड़े राष्ट्रीय सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड की गरिमा धूमिल हो रही है। मेरा मानना है कि सरकार की तरफ से दिया जाने वाला दादा साहब फाल्के पुरस्कार ही सही है, बाकी जितने भी अवॉर्ड दादा साहब के नाम पर हो रहे हैं, वह सब नकली है और पैसे लेकर दिए जाते हैं।’
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