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इस वजह से मोहम्मद रफी ने छुपाकर रखी थी पहली शादी, सालों बाद बेटी ने किया खुलासा

Tue, 30 Jul 2019 02:33 PM IST
shrilata biswas एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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mohammad rafi - फोटो : file photo
बॉलीवुड सिंगर मोहम्मद रफी हिंदी सिनेमा के महान गायकों में से एक हैं। 31 जुलाई 1980 को मोहम्मद रफी ने दुनिया को अलविदा कह दिया। इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं उनकी पहली शादी के बारे में, जो दुनिया से छिपी थी। इस शादी के बारे में बस उनके घरवाले जानते थे। यह बात शायद कभी किसी को पता भी नहीं चलती अगर रफी की बेटी यास्मीन खालिद रफी किताब ना लिखतीं। यास्मीन की प्रकाशित किताब 'मोहम्मद रफी मेरे अब्बा..एक संस्मरण' में उनकी पहली शादी की बात का जिक्र किया गया है।
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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
3 साल की उम्र में पहली शादी
13 साल की उम्र में रफी की पहली शादी उनके चाचा की बेटी बशीरन बेगम से हुई थी लेकिन कुछ साल बाद ही उनका तलाक हो गया था। इस शादी से उनका एक बेटा सईद हुआ था। उनकी इस शादी के बारे में घर में सभी को मालूम था लेकिन बाहरी लोगों से इसे छिपा कर रखा गया था। घर में इस बात का जिक्र करना भी मना था क्योंकि रफी की दूसरी बीवी बिलकिस बेगम इसे बिल्कुल नापसंद करती थीं और उन्हें बर्दाश्त नहीं था कि कोई इस बारे में बात करे।
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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
20 साल की उम्र में दूसरी शादी
1944 में 20 साल की उम्र में रफी की दूसरी शादी सिराजुद्दीन अहमद बारी और तालिमुन्निसा की बेटी बिलकिस के साथ हुई। जिनसे उनके तीन बेटे खालिद, हामिद और शाहिद व तीन बेटियां परवीन अहमद, नसरीन अहमद और यास्मीन अहमद हुईं। रफी साहब के तीनों बेटों सईद, खालिद और हामिद की मौत हो चुकी है। आजादी के समय विभाजन के दौरान रफी ने भारत में रहना पसन्द किया। 31 जुलाई 1980 को उनका निधन हो गया।

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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
मुस्लिम परिवार में जन्म हुआ था
पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में  24 दिसंबर 1924 को हाजी अली मोहम्मद के परिवार में मोहम्मद रफी का जन्म हुआ था। हाजी अली मोहम्मद के छह बच्चों में से रफी दूसरे नंबर पर थे। उन्हें घर में फीको कहा जाता था। गली में फकीर को गाते सुनकर रफी ने गाना शुरू किया था। 1935 में रफी के पिता लाहौर चले गए और वहां भट्टी गेट के नूर मोहल्ला में हजामत बनाने का काम शुरू किया।
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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
26 हजार गाने गाए थे रफी ने
मोहम्मद रफी ने अपनी जिंदगी में करीब 26 हजार गीत गाये और लगभग हर भाषा में। वर्ष 1946 में फिल्म 'अनमोल घड़ी' में 'तेरा खिलौना टूटा' से हिन्दी सिनेमा की दुनिया में कदम रखा। उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। रफी बहुत ही शर्मीले स्वभाव के थे। न किसी से ज्यादा बातचीत और न ही किसी से कोई लेना-देना। न शराब का शौक न सिगरेट का। न पार्टियों में जाने का शौक, न ही देर रात घर से बाहर रहने की फितरत। 
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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
दयालु प्रवृत्ति के इंसान थे रफी
मोहम्मद रफी काफी दयालु इंसान थे। वह कभी भी संगीतकार से ये नहीं पूछते थे कि उन्हें गाने के लिए कितना पैसा मिलेगा। वह आकर गीत गा दिया करते थे और कभी कभी एक रुपया लेकर गीत गा दिया करते थे। रफी किसी फर्जी नाम से पड़ोस की एक विधवा को पैसे भेजा करते थे। कई साल तक मनी ऑर्डर आया, पर जब मनी ऑर्डर आना बंद हुआ तो महिला पोस्ट ऑफिस गई। वहां पता चला कि मनीऑर्डर भेजने वाले का निधन हो गया और उनका नाम मोहम्मद रफी था।
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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
लता मंगेशकर से 6 साल बात नहीं की
रफी साहब और लता मंगेशकर के बीच सालों तक बातचीत बंद रही। दोनों ने कई साल साथ गाना नहीं गाया। वजह थी प्लेबैक सिंगर को रॉयल्टी मिलने की। लता मंगेशकर इसके हक में थीं और चाहती थीं कि रफी उनका साथ दें, पर रफी खिलाफ थे। फिर माया फिल्म के गाने तस्वीर तेरी दिल में...के अंतरे को लेकर दोनों में बहस हो गई। लता ने घोषणा कर दी कि वो रफी के साथ नहीं गाएंगी। बाद में संगीतकार जयकिशन ने सुलह कराई, फिर एसडी बर्मन म्यूजिकल नाइट में उन्होंने एक साथ स्टेज पर गाया।

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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
पंडित नेहरू ने रजत पदक से सम्मानित किया था
1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद हुस्नलाल-भगतराम, राजेंद्र कृष्ण और मोहम्मद रफी ने रात ही रात में एक गाना तैयार किया - सुनो सुनो ऐ दुनिया वालों बापू की ये अमर कहानी....। एक दिन उन्हें पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने घर बुलाया। वहां एक कार्यक्रम रखा गया था, जिसमें पंडित जी ने रफी से यही गाना सुनाने की फरमाइश की। पंडित जी को वह गाना इतना पसंद आया कि उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर रफी को रजत पदक से सम्मानित किया।

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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
निधन से दो दिन पहले आखिरी गाना गाया था
मोहम्मद रफी का आखिरी गीत फिल्म 'आस पास' के लिए था, जो उन्होंने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के लिए अपने निधन से ठीक दो दिन पहले रिकॉर्ड किया था। गीत के बोल थे 'शाम फिर क्यों उदास है दोस्त'...। मोहम्मद रफी ने किशोर कुमार की फिल्मों के लिए भी गीत गाये हैं, जिनमें फिल्म 'बड़े सरकार', 'रागिनी' और कई फिल्में शामिल थीं। रफी ने किशोर कुमार के लिए करीब 11 गाने गाए।

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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
बाबुल की दुआएं गीत के मिला नेशनल अवार्ड
फिल्म 'नील कमल' के गाने 'बाबुल की दुआएं लेती जा' के लिए रफी साहब को नेशनल अवार्ड मिला था। इस गीत को गाते समय कई बार उनकी आंखें नम हुईं। वजह खास ये थी कि इस गीत को रिकॉर्ड करने से एक दिन पहले उनकी बेटी की सगाई हुई थी और कुछ दिन में शादी थी इसलिए वो काफी भावुक थे, फिर भी उन्होंने ये गीत गाया और इस गीत के लिए उन्हें 'नेशनल अवॉर्ड' मिला।
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Mohammed Rafi - फोटो : social media
रमजान के महीने में हुआ था निधन
मोहम्मद रफी का निधन रमजान के महीने में हुआ था। जिस दिन उनकी अंतिम विदाई थी, उस दिन मुंबई में जोरों की बारिश हो रही थी। फिर भी अंतिम यात्रा में कम से कम 10000 लोग सड़कों पर थे और उस दिन मशहूर एक्टर मनोज कुमार ने कहा, 'सुरों की मां सरस्वती भी अपने आंसू बहा रही हैं आज'। रफी साहब को पतंग उड़ाने का शौक था। रिकॉर्डिंग करने के बाद वे पतंग उड़ाया करते थे।
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