'रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझको मनाने के लिए आ'
शहंशाह-ए-गजल मेहदी हसन की आज यानी 13 जून 2020 को पुण्यतिथि है। 60 और 70 के दशक की शायद ही ऐसी कोई बड़ी फिल्म हो, जिसमें मेंहदी हसन का गाना न हो। साल 2012 में आज ही के दिन मेहदी हसन दुनिया से रुख्सत हुए थे। उन्होंने अपनी दिलकश आवाज से सबको अपनी गायकी का दीवाना बना दिया था। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक दौर ऐसा भी था जब उन्हें अपने ही वजूद के लिए लड़ना पड़ रहा था। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे ने उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया था। 18 जुलाई 1927 को मेहदी हसन का जन्म राजस्थान के लूणा गांव में ही हुआ था। यहां बचपन बीता और जवानी के दिनों में भारत विभाजन के वक्त परिवार समेत पाकिस्तान चले गए थे। उनकी पुण्यतिथि के मौके पर हम आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातें बताएंगे।
गजल गायिकी मेहदी को विरासत में मिली थी। दरअसल, उनके दादा इमाम खान भी बड़े कलाकार थे, जो उस समय बड़े दरबारों में गाया करते थे। इसके अलावा मेहदी के पिता भी कलाकार थे जिस वजह से गाना उनके जीवन में उनके जन्म के साथ ही आया था।