60 और 70 के दशक की शायद ही ऐसी कोई बड़ी फिल्म हो, जिसमें मेंहदी हसन का गाना न हो। उन्होंने अपनी दिलकश आवाज से सबको अपनी गायकी का दीवाना बना दिया था। आज उनकी जन्मतिथि है। 18 जुलाई 1927 को मेहदी हसन का जन्म राजस्थान के लूणा गांव में ही हुआ था। यहां बचपन बीता और जवानी के दिनों में भारत विभाजन के वक्त परिवार समेत पाकिस्तान चले गए थे। गजल गायिकी मेहदी को विरासत में मिली थी। दरअसल, उनके दादा इमाम खान भी बड़े कलाकार थे, जो उस समय बड़े दरबारों में गाया करते थे। इसके अलावा मेहदी के पिता भी कलाकार थे जिस वजह से गाना उनके जीवन में उनके जन्म के साथ ही आया था।
उन्हें 'किंग ऑफ गजल' और शहंशाह-ए-गजल भी कहा जाता था। मेहदी हसन गजल के साथ-साथ ठुमरी और फिल्मी गानों के लिए भी काफी लोकप्रिय थे। आज शहंशाह-ए-गजल मेहदी हसन के जन्मदिन जंयती के मौके पर हम उनकी उन पांच गजलों की बात करेंगे, जिन्हें सुनकर आज भी लोग मदहोश हो जाते हैं।