माला सिन्हा
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1957 में आई गुरुदत्त की फिल्म प्यासा की स्क्रिप्ट पहले मधुबाला के लिए लिखी गई थी। मधुबाला यह फिल्म नहीं कर पाईं तो माला सिन्हा को इसमें काम मिल गया। प्यासा ने माला सिन्हा के लिए फिल्मों के रास्ते खोल दिए। इसके बाद उन्होंने धूल का फूल, फिर सुबह होगी, हरियाली और रास्ता, अनपढ़, दिल तेरा दीवाना, गुमराह बहूरानी, जहांआरा, हिमालय की गोद में, आंखें, दो कलियां और मर्यादा सहित अनेक फिल्में कीं।