सृष्टि तावड़े
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सृष्टि ने आगे बताया, ‘मेरे घर में रहते दोनों एक-दूसरे से मिलने में असफल रहते थे। इसलिए मुझे चुप कराने के लिए वह काम वाली दीदी मुझे बुरी तरह पीटा करती थी। यही नहीं, मुझे धमकाया भी जाता था कि यह बात मैं अपने आई बाबा से ना कहूं। उस वक्त मैं इतना डरी हुई थी कि उनके आने भर से ही मैं कांपने लगती थी। मेरा यह बचपन का ट्रॉमा आज भी कई बार मुझे सताता है।’