दिलीप कुमार ने छह दशकों तक चले अपने फिल्मी करियर में मात्र 63 फिल्में की हैं लेकिन उन्होंने हिंदी सिनेमा में अभिनय की कला को नई परिभाषा दी है। आज भी दिलीप कुमार का रुतबा वैसे ही कायम है जैसे पहले हुआ करता था। लोग दिलीप कुमार की एक झलक पाने के लिए पागल रहते थे।
विज्ञापन
2 of 5
दिलीप कुमार
दिलीप कुमार को भी अपने 'दिलीप कुमार' होने पर गर्व था क्योंकि ये वो दौर था जब दिलीप कुमार सफलता की नई ऊंचाईयां छू रहे थे। दिलीप कुमार ने 'गंगा जमना' में एक 'गंवार' किरदार को जिस खूबी से निभाया, उतना ही न्याय उन्होंने मुगले आजम में मुगल शहजादे की भूमिका के साथ किया। वैसे तो दिलीप कुमार के कई किस्से मशहूर हैं लेकिन एक किस्सा जेआरडी टाटा से जुड़ा हुआ है।
विज्ञापन
3 of 5
dilip kumar
दरअसल एक बार जब दिलीप प्लेन से कहीं जा रहे थे। इसी प्लेन में बैठे अन्य लोग दिलीप को देखकर उनसे बात करने की कोशिश करने लगे। कोई-कोई तो ऑटोग्राफ लेने के लिए उनकी सीट तक आ पहुंचा। लेकिन उनके बगल की सीट पर बैठे एक शख्स को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा कि उनके साइड वाली सीट पर कौन बैठा है। वो शख्स विंडो से लगातार बाहर देख रहा था।
4 of 5
दिलीप कुमार
इस बात से हैरान जब दिलीप कुमार ने उस शख्स से पूछा कि क्या आप फिल्में नहीं देखते। इस पर उस शख्स ने जवाब दिया- बहुत कम, सालभर पहले एक फिल्म देखी थी। इसी बीच दिलीप ने कहा 'मैं दिलीप कुमार हूं' तो बगल की सीट पर बैठे उस शख्स ने कहा 'क्या करते हैं आप फिल्मों में'। दिलीप कुमार ने जवाब दिया 'मैं एक्टर हूं'।
इस पर बगल में बैठे उस शख्स ने अपना परिचय देते हुए कहा- 'मेरा नाम जेआरडी टाटा है'। टाटा का नाम सुनते ही दिलीप कुमार चौंक गए। उन्होंने इस वाकये का जिक्र अपनी ऑटोबायोग्राफी में भी किया है। दिलीप कुमार को अंदाजा भी नहीं हुआ कि जिस शख्स से वो आम इंसान समझकर अपना स्टारडम दिखा रहे थे वो कोई और नहीं बल्कि जे आर डी टाटा थे।