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जब मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर में इस बात को लेकर ठन गई, साथ गाना तक कर दिया था बंद

Tue, 28 Sep 2021 11:47 AM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी - फोटो : सोशल मीडिया
अपनी आवाज से लाखों दिलों पर राज करने वालीं लता मंगेशकर का आज जन्मदिन है। लता मंगेशकर 28 सितंबर 1929 को इंदौर में मशहूर संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर के यहां पैदा हुई थीं। लता जी ने अपनी आवाज से बहुत छोटी उम्र में ही गायन में महारत हासिल की और विभिन्न भाषाओं में गीत गाए। लता मंगेशकर ने मोहम्मद रफी के संग कई सुपरहिट गाने गाए हैं। लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब दोनों ने एक दूसरे के साथ गाना ही बंद कर दिया। आज हम आपको वही किस्सा बताने जा रहे हैं।

दरअसल गाने की रॉयल्टी के भुगतान के मुद्दे पर लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच इस कदर मतभेद उत्पन्न हो गए थे कि इन दोनों गायकों ने करीब चार वर्ष तक एक साथ गाना नहीं गाया। 
 
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लता मंगेशकर - फोटो : twitter@mangeshkarlata
दरअसल लता मंगेशकर का यह मानना था की सिंगर्स को रॉयल्टी मिलनी चाहिए, तो वहीं मोहम्मद रफी का कहना था कि एक बार गीत के रिकॉर्ड हो जाने के बाद, सिंगर का कोई अधिकार उस पर नहीं रह जाता। बहुत-से लोग ऐसे हैं, जो यह मानते हैं कि कलाकार के अधिकारों के लिहाज से लता अपनी जगह सही थीं। तो कईयों ने उस वक्त रफी का साथ दिया था।
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मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर - फोटो : File Photo
इस किस्से का जिक्र प्रयाग शुक्ल ने अपनी किताब ''मोहम्मद रफी स्वयं ईश्वर की आवाज'' में किया है। वे लिखते हैं लता ने यह बात कही है कि रफी के नाम का जिक्र आते ही वे उन दिनों में लौटने को मजबूर हो जाती हैं, जब एक सिंगर को, किसी गीत पर रॉयल्टी मिले या न मिले, के सवाल पर उनसे अपनी असहमति जाहिर की थी। 

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लता मंगेशकर - फोटो : Social Media
लता मंगेशकर रॉयल्टी का भुगतान किए जाने के पक्ष में थीं। उन्हें उम्मीद थी कि इस विषय पर रफी उनका समर्थन करेंगे जो उचित भी था। लेकिन मोहम्मद रफी ने वो कह दिया जो किसी को उम्मीद ही नहीं थी। लता ने यह निर्णय ले लिया था कि अब वह रफी के साथ नहीं गाएंगी। इस बारे में जब रफी को जानकारी हुई तो उन्होंने एक सधा हुआ जवाब दिया ''अगर उनकी मेरे साथ गाने में दिलचस्पी नहीं है, तो फिर मुझे भी कैसे हो सकती है।''
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लता मंगेशकर - फोटो : @FilmHistoryPic
स्थिति तब और बिगड़ गई, जब दोनों ने एक-दूसरे के साथ गाना बंद कर दिया। जब लता की जगह सुमन कल्याणपुर को जगह मिलने लगी तो लता जी परेशान हुईं और उन्होंने शंकर-जयकिशन से संपर्क किया कि वह रफी के साथ उनका समझौता करा दें। बाद में दोनों की करीब चार साल की लड़ाई खत्म हुई और इस घटनाक्रम के बाद दोनों ने फिल्म पलकों की छांव में एक साथ गाना गाया।
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