केजीएफ चैप्टर 2
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हिंदी में ब्लॉकबस्टर फिल्म
‘केजीएफ 2’ में इसे हिंदी में लिखने वाली टीम ने कमाल का काम किया है। इसके संवाद आपको आखिर तक याद रह जाते हैं, जैसे, ‘यहां सिर शाश्वत नहीं है, सिर्फ ताज शाश्वत है’। या फिर, ‘हिम्मत के लिए दो चीजें चाहिए होती हैं, एक पागलपन और दूसरा ईमानदारी। पागलपन हम यहां रोज देखते हैं, ये देखो ईमानदारी..!’ फिल्म में एक जगह रॉकी ये भी कहता है कि ये मां की जिद की कहानी है। लेखक और निर्देशक प्रशांत नील के जुनून से बनी इस फिल्म में सलीम-जावेद की लिखावट के सारे फॉर्मूले हैं। ध्यान से देखें तो यश के हावभाव, उनके पहनावे, उनकी अकड़ और उनके रुआब में आपको कभी ‘दीवार’, कभी ‘शोले’ तो कभी ‘सुहाग’ के अमिताभ बच्चन का अक्स नजर आएगा।