कटी पतंग का एक दृश्य
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
‘ना कोई उमंग है, ना कोई तरंग है...’
फिल्म ‘कटी पतंग’ से पहले फिल्म ‘आराधना’ में राजेश खन्ना के साथ शक्ति सामंत ने उस समय की नंबर वन और अपनी फेवरिट हीरोइन शर्मिला टैगोर को ही लिया था। फिल्म ‘कटी पतंग’ में भी वह शर्मिला को ही लेना चाहते थे, लेकिन उस समय तक सैफ अली खान उनकी कोख में आ चुके थे। वह यह रोल चाहकर भी नहीं कर पाईं। आशा पारेख के साथ राजेश खन्ना इससे पहले फिल्म ‘बहारों के सपने’ में काम कर चुके थे, और फिल्म कब आई, कब गई किसी को पता तक नहीं चला लेकिन शक्ति सामंत को आशा पारेख की क्षमता पर पूरा भरोसा था। फिल्म ‘कटी पतंग’ की कहानी दरअसल महिला प्रधान फिल्म की कहानी है। आशा पारेख ने ये रोल सुना तो तपाक से स्वीकार कर लिया। इस फिल्म की चर्चा चलने पर आशा पारेख कहती हैं, ‘शक्ति सामंत जी की फेवरिट हीरोइन तब शर्मिला टैगोर हुआ करती थीं। वह शायद विधवा का किरदार नहीं करना चाहती थीं और मैंने पर्दे पर बिना ग्लैमर के दिखने का ये मौका जाने नहीं दिया। फिल्म विधवा विवाह के एक बहुत ही संवेदनशील विषय पर बनी फिल्म थी और राजेश खन्ना तब तक बहुत बड़े सुपरस्टार भी बन चुके थे लेकिन उन्होंने एक महिला प्रधान फिल्म में काम करने में जरा भी हिचक नहीं दिखाई। हमने इससे पहले फिल्म ‘बहारों के सपने’ में काम किया था, लेकिन अब मामला अलग था। फिल्म के सारे हिट गाने राजेश पर फिल्माए गए। लेकिन, फिल्म का शीर्षक गीत जिसे लता जी ने गाया है, ‘ना कोई उमंग है, ना कोई तरंग है, मेरी जिंदगी है क्या, एक कटी पतंग है..’ मेरे ऊपर फिल्माया गया और आज भी मैं ये गाना सुनती हूं तो मेरे दिल में एक हूक सी उठती है।’