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15 साल बाद जॉन अब्राहम का बड़ा खुलासा, बोले- 'मैं जो कुछ हूं गलतियों की वजह से हूं'

Sat, 22 Dec 2018 07:59 AM IST
शिप्रा सक्सेना मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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John Abraham - फोटो : File Photo
'जीरो' की रिलीज ने हिंदी सिनेमा की बरसों से चली आ रही रीतियों के तमाम जाले एकदम से साफ कर दिए हैं। यह जाले साफ करने में अभिनेता-निर्माता जॉन अब्राहम पिछले कई साल से लगे हैं। साल 2018 में सिर्फ दो अभिनेता ऐसे हैं जिनकी फिल्मों ने 300 करोड़ रुपए के आसपास कमाए। एक हैं आयुष्मान खुराना और दूसरे जॉन अब्राहम। दिलचस्प बात यह है कि आयुष्मान खुराना को जॉन ने ही बड़े परदे पर लांच किया। जॉन अब्राहम से अमर उजाला की मुलाकात के कुछ अंश।
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John Abraham - फोटो : File Photo
15 साल पहले जिस इंसान को मॉडल है दो तीन गाने कर फाइट कर लेगा लेकिन ऐक्टिंग नहीं कर पाएगा। ऐसा कहने वाली इंडस्ट्री आज उसकी डेट्स के लिए परेशान है। कैसे आया ये बदलाव?
सही कहा आपने। आपने जो बातें कहीं बिल्कुल सही हैं। मैं मार्केटिंग का आदमी हूं। मुझे शुरू में पता था कि वही बेचो जो लोग पसंद कर रहे हैं। मेरा चेहरा बिकाऊ था। मेरी फिटनेस के लोग कायल थे। तो मैंने वही बेचा। लेकिनए फिर धीरे धीरे ये सब करते हुए मैं परेशान होने लगा। लेकिन मेरे पास जो ऑफर्स आ रहे थे वह अब भी वैसे ही थे तो मैंने समझ बूझकर निर्माता बनने का फैसला लिया कि मैं वैसी फिल्में करूंगा जो मैं करना चाहता हूं।
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john abraham - फोटो : File Photo
तो आपने मानते हैं कि शुरू में आपसे गलतियां हुईं। फिल्मों के मामले में रिश्तों के मामले में?
जी हां और मैं गलतियां स्वीकार करने में गुरेज नहीं करता। फिल्मों में भी और रिश्तों में भी मैंने गलतियां की हैं। और मैं ये कह सकता हूं कि अब जो मैं हूं वह इन्हीं गलतियों की वजह से ही हूं। युवा पीढ़ी के लोग मुझसे मिलने आते हैं और सलाह मांगते हैं। मैं उनके बस इतना कहता हूं कि आप सब वही करना जो मैंने नहीं किया।

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ayushmann khurrana - फोटो : File Photo
आयुष्मान खुराना साल 2018 के सबसे बड़े स्टार हैं। कैसे है उनसे अब आपका रिश्ता?
यह उन दिनों की बात है जब मेरे पास स्क्रिप्ट आई थी जाफना के नाम से। फिर इसी पर मद्रास कैफे के नाम से फिल्म बनी। उसी समय मेरे पास शुजीत यह 'विकी डोनर' की स्क्रिप्ट लेकर आए। आयुष्मान को मैंने टीवी पर देखा वीजे के रूप में। मुझे लगा कि चंडीगढ़-दिल्ली का यह लड़का ये रोल सही कर लेगा। 'शुभ मंगल सावधान', 'बधाई हो' ये एक नया जॉनर बना 'विकी डोनर' के बाद। आयुष्मान से गाहे बेगाहे बात मुलाकात होती रहती है। एक स्क्रिप्ट हमने सुनाई है आयुष्मान को। उसे अच्छी भी लगी है। खुशखबरी जल्दी आनी चाहिए।
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john abraham - फोटो : File Photo
'मद्रास कैफे' की बात हम कर रहे थे। भारत में पॉलिटिकल थ्रिलर बनाना बहुत मुश्किल है। सेंसर और सियासत को देखते हुए। राजीव गांधी हत्याकांड पर ही फिल्म क्यों बनाई अपनी इमेज बदलने के लिए?
मैं ना सो रहा था। मेरे चेहरे में एक बूंद गिरी। आंख खुली तो देखा कि मां परदे खोल रही हैं और रो रही हैं। मैंने पूछा कि क्या हुआ तो उन्होंने बताया कि राजीव गांधी की हत्या हो गई है। फिर मैंने टेलीविजन पर देखा। मैगजीन के कवर पर देखा। राजीव गांधी का चेहरा और लोटो के जूते मेरे जेहन में कैद हो गए। अब भी मैं इस बारे में बात करता हूं तो झुरझुरी सी होती है। इस फिल्म के लिए हमने जैन कमीशन की पूरी 300 पन्नों की रिपोर्ट पढ़ी। लोग बोलते थे कि ये क्या बना रहे हो? फिर इम्तियाज अली. कबीर खान. निखिल आडवाणी सबने तारीफ की तो मुझे लगा कि मैंने कुछ गलत नहीं किया। क्या है हम एक्टर्स लोग भिखारी हैं। तारीफ के भूखे। कहीं से मिलती है तो आमदनी समझकर जेब में तुरंत रख लेते हैं।
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John Abraham - फोटो : file photo
तो जॉन अब्राहम परदे पर भी जॉन न लगे इसके लिए क्या कुछ करते हैं?
मेरे प्रोडक्शन हाउस की हर फिल्म की रीढ़ है रिसर्च। हम इतनी रिसर्च करते हैं कि जब कोई बाहर का प्रोड्यूसर हमारे पास कोई सब्जेक्ट लेकर आता है तो मैं सोचता रहता हूं कि ये क्या नया सुनाएगा। 'बाटला हाउस' को ही लें। इसमें जो मेरा किरदार है उसके एक एक एक्शन की मैंने रिसर्च की है। 'बाटला हाउस' सुनते ही हमारे दिमाग में घूमते हैं इससे जुड़े विवाद। लोग क्या कहते हैं? प्रत्यक्षदर्शी क्या कहते हैं? पुलिस क्या कहती है? मेरे दिमाग में भी यही तीनों बातें इस विषय को लेकर आई और हमने फिल्म भी इन तीनों नजरियों से ही बना दी है। अब दर्शक को तय करना होगा कि सही क्या है और गलत क्या?
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John Abraham - फोटो : File Photo
बॉक्स ऑफिस पर कहानी का कब्जा हो रहा है और सितारे डूब रहे हैं?
मैं आपको लिखकर दे सकता हूं कि आज की तारीख में कितना ही बड़ा सुपरस्टार होए कितना ही बड़ा डायरेक्टर हो बॉक्स ऑफिस की गारंटी आज की तारीख में नहीं दे सकता। आज का दर्शक बदल चुका है। आप उसे बुद्धू नहीं बना सकते। मैं तो कहता हूं कि आप का टाइम ओवर हो चुका है। 

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John Abraham - फोटो : file photo
एक आखिरी सवाल। आपको कब महसूस हुआ कि आप हीरो मैटीरियल है?
आपने एक बात बहुत अहम दिन याद दिला दिया। मेरी मॉडलिंग ठीक ठाक चल रही थी और मुझे दुबई से पहले शो का ऑफर आया। पहली बार दुबई जा रहा था तो मम्मी-पापा को भी साथ ले लिया। उसी फ्लाइट में मुझे धर्मेंद्र जी मिल गए। उन्होंने मेरी तरफ देखा न जान न पहचान। पूछा अकेले हो? मैंने कहा नहीं मम्मी पापा के साथ हूं। उन्होंने मेरी मां से कहा देख लेना यह लड़का एक दिन बहुत बड़ा स्टार बनेगा। अब आज आपने कहा तो मुझे ये याद आया। धर्मेंद्र जी ने वो मजबूत सा हाथ मेरे सिर पर रखा था उस दिन और बहुत सारा आशीर्वाद दिया।
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john abraham - फोटो : file photo
सोशल मीडिया से दूर?
मेरा सोशल मीडिया से बहुत ज्यादा नाता नहीं है। जो कुछ है भी वह बहुत दिनों तक चलेगा नहीं। मैं काम में यकीन रखता हूं। ये नहीं कि पॉटी भी जाऊं तो उसकी तस्वीरें इंस्टाग्राम या फेसबुक पर शेयर करता रहूं। मैं कलाकार हूं। मेरा जीवन परदे पर है। अगर सब कुछ सोशल मीडिया पर ही साझा कर दूंगा तो फिर मेरी खासियत क्या बचेगी। दूसरा ये समय भी बहुत बर्बाद कराती है। काम ज्यादा जरूरी है। मेरे बारे में लोग तो वैसे ही जान जाएंगे अगर मेरा काम अच्छा रहेगा।
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