फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विवादों में कंगना: जीतन राम मांझी की बहू का कंगना पर निशाना, कहा- औकात है तो बिहार में बोलकर दिखाओ

Fri, 12 Nov 2021 04:49 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 5
कंगना रणौत - फोटो : Instagram
देश की आजादी का साल 2014 बताकर कंगना रणौत चौतरफा विवादों में घिर गई हैं। कहीं उनपर एफआईआर दर्ज हो रही है तो कहीं कोई उन्हें देशद्रोही करार दे रहा है। अब कंगना पर जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी ने निशाना साधा है और उन्हें शूर्पणखा की बहन कहा है, साथ ही कंगना को बिहार में ऐसा बोलने का चैलेंज दिया है। 

 
विज्ञापन

2 of 5
कंगना रणौत - फोटो : सोशल मीडिया
जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी ने लिखा- ई कंगना रणौत के पता नहीं है कि एकरा जईसन कलमुही के हमनी बिहारी गोबर पाथे लायक नहीं बुझते हैं। पद्म सम्मान मिल गया तो शहीदों को ही अपमानित करने लगी। अरे हो देशद्रोही कंगना,औकात है तो ई भाषा बिहार में बोलकर दिखाव,मुंह कीचड़ में ना डुबा दिया तो कहना। लतखोर! “शूर्पणखा की बहन कंगना”
 
विज्ञापन

3 of 5
रणदीप सिंह सुरजेवाला, महासचिव, कांग्रेस - फोटो : ANI
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कंगना के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, आज़ादी के 75 वें साल में आज़ादी के रणबाँकुरों का अपमान और गाँधी-नेहरू-पटेल-बोस-भगत सिंह और लाखों स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष व बलिदान वो नहीं समझ सकते जो “अंग्रेज के पिट्ठू” थे।


 

4 of 5
कंगना रणौत - फोटो : सोशल मीडिया
बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने कंगना के लिए लिखा था, कभी महात्मा गांधी जी के त्याग और तपस्या का अपमान, कभी उनके हत्यारे का सम्मान, और अब शहीद मंगल पाण्डेय से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों का तिरस्कार। इस सोच को मैं पागलपन कहूँ या फिर देशद्रोह?
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
कंगना रणौत - फोटो : instagram/viralbhayani
क्या कहा है कंगना ने
कंगना ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बारे में सावरकर, लक्ष्मीबाई और नेताजी बोस को याद करते हुए कहा था- ये लोग जानते थे कि खून बहेगा, लेकिन यह हिंदुस्तानी खून नहीं होना चाहिए। वे इसे जानते थे। बेशक, उन्हें एक पुरस्कार दिया जाना चाहिए। वह आजादी नहीं थी, वो भीख थी। हमें 2014 में असली आजादी मिली है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें