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प्रवासी मजदूरों पर ट्वीट कर ट्रोल हुए जावेद अख्तर, ट्रोलर बोला- 'सर्कुलर समझ नहीं आता ..'

Fri, 15 May 2020 12:25 AM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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जावेद अख्तर - फोटो : Social Media
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन लगा हुआ है। सब कुछ बंद होने की वजह से देश के मजदूरों और गरीबों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। ऐसे में कई प्रवासी मजदूर अपने परिवार के साथ हजारों किलोमीटर पैदल ही घर की तरफ रवाना हो चुके हैं। हर दिन ऐसी कई तस्वीरें सामने आ रही हैं जिनमें इनकी दयनीय स्थिति देखकर कलेजा फटने लगता है। मजदूरों के ये हालात देखकर गीतकार जावेद अख्तर का गुस्सा फूट पड़ा है। 
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javed akhtar - फोटो : Social Media
जावेद अख्तर ने ट्वीट करते हुए सरकार को घेरा और कई सवाल भी पूछे। उन्होंने लिखा, '30 जून तक ट्रेन नहीं चलाने का क्या मतलब है? प्रवासी मजदूर वापस अपने घर जाना चाहते हैं और वापस जाने का उन्हें पूरा अधिकार भी है, लेकिन विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग सस्ती लेबर को जाने नहीं देना चाहता। गलत तरीके से उनके रास्ते को रोकने की कोशिश करके क्या हम उन्हें बंधुआ मजदूरी में बदलने की कोशिश नहीं कर रहे हैं?'
 
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जावेद अख्तर - फोटो : अमर उजाला
हालांकि जावेद अख्तर के इस ट्वीट पर लोग समर्थन कम उन्हें ट्रोल ज्यादा कर रहे हैं। कुछ यूजर्स कह रहे हैं कि मजदूरों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जिनसे मजदूर अपने घरों को लौट रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है, 'एक सर्कुलर तो समझ नहीं आता और इतिहास के ज्ञाता बनते हैं, मुगलों की अर्थव्यवस्था समझाते हैं। आप नास्तिक नहीं निरक्षर हैं।'
 

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जावेद अख्तर
याद दिला दें कि ऐसा पहली बार नहीं है जब जावेद किसी ट्वीट को लेकर सुर्खियों में हैं। इससे पहले जावेद अख्तर ने एक ट्वीट में लिखा था, 'भारत में तकरीबन 50 साल तक लाउडस्पीकर पर अजान हराम थी। इसके बाद ये हलाल हो गई और इस कदर हलाल हुई कि इसकी कोई सीमा ही नहीं रही। अजान करना ठीक है लेकिन लाउडस्पीकर पर इसे करना दूसरों के लिए असुविधा का कारण बन जाता है। मुझे उम्मीद कि कम से कम इस बार वो इसे खुद करेंगे।' इस ट्वीट को लेकर भी सोशल मीडिया पर जावेद के खूब चर्चे हो रहे थे।
 
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स्टेशन पहुंचने से पहले ट्रेन को सैनिटाइज किया गया - फोटो : a
श्रमिक और स्पेशल ट्रेनों पर नहीं पड़ेगा असर
बता दें कि भारतीय रेलवे ने 30 जून तक के सभी टिकटों को रद्द कर दिया है, साथ ही इन टिकटों का पैसा भी रिफंड कर दिया गया है। हालांकि, इसका श्रमिक और स्पेशल ट्रेनों पर असर नहीं पड़ेगा और वो जारी रहेंगी। पहले की तरह ही इन ट्रेनों के जरिए लोग लौट पाएंगे। बता दें कि प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष तौर पर श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। ऐसी रोजाना करीब सौ ट्रेनें चल रही हैं। इन ट्रेनों के माध्यम से अबतक पांच लाख से अधिक मजदूरों को वापस पहुंचाया जा चुका है और लगातार ये व्यवस्था जारी है।

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