बाबिल, सुतापा सिकदर
- फोटो : Insatagram- @babil.i.k
अब बाबिल की मां सुतापा सिकदर ने अपने बेटे के लिए एक खूबसूरत कविता लिखी है। कविता की शुरुआती पंक्तियां कुछ इस तरह है...
मेरा बेटा
बड़ा कड़क लौंडा है वो
चुप चुप के नहीं सबके सामने जोर जोर रोता है वो
बड़ा कड़क लौंडा है
बाप के यादों को समेटता है नाजुक अंगुलियों से
बिखेरता है उन्हें खुशबू कि तरह
सहेजता है उन्हें बंद डायरी में
बड़ा सख्त लौंडा है वो
अपनी मां को गले लगाके कह पाता है
'पूरी ज़िंदगी तू घना पेड़ थी हम सब के लिए
अब उड़ मां पंख फैलाए होश गवाएं'