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ठाकरे को मिला फिल्म निर्माताओं की सबसे बड़ी संस्था का साथ, इम्पा ने पत्र लिखकर दिक्कतें भी गिनाईं

Fri, 04 Dec 2020 06:32 PM IST
Mishra Mishra पंकज शुक्ल
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे - फोटो : पीटीआई
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से यहां की राजनीति में मची हलचल के बीच हिंदी फिल्म निर्माताओं की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी संस्था इम्पा (इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का साथ देने का फैसला किया है। हालांकि, ये फैसला कई शर्तों के साथ है। इम्पा ने महाराष्ट्र सरकार से मुंबई और महाराष्ट्र के दूसरे शहरों में फिल्मों की शूटिंग के दौरान होने वाली गुंडागर्दी को रोकने के साथ फिल्म जगत को दूसरे उद्योगों की तरह सहूलियत देने की मांग भी की है।
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योगी आदित्यनाथ-उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन यानी इम्पा की प्रबंध समिति ने आपस में विचार विमर्श करने के बाद एक पत्र महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजा है। पत्र में इस बात पर खुशी जताई गई है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के मुंबई दौरे के बाद ठाकरे ने महाराष्ट्र को न सिर्फ फिल्म जगत का उद्भव केंद्र बताया बल्कि ये भी कहा कि फिल्म उद्योग को महाराष्ट्र में ही बनाए रखने के लिए वह हर संभव प्रयत्न करेंगे। इसके बाद पत्र में इम्पा की तरफ से इसके अध्यक्ष टी पी अग्रवाल ने लिखा कि इम्पा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की उस राय से पूरी तरह सहमत है जिसमें उन्होंने मुंबई को ही हिंदी फिल्म जगत का प्राथमिक स्थान बताया है। पत्र में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दूसरे शीतोष्ण राज्यों में शूटिंग के दौरान होने वाली परेशानियों का भी हवाला दिया गया है।
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फिल्म की शूटिंग का सीन - फोटो : अमर उजाला
इम्पा ने शिवसेना और बीजेपी के बीच फिल्म सिटी को लेकर चल रही तनातनी के बीच अपना दांव भी खेला है। देश की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री यानी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री मुंबई में ही पनपती रहे इसके लिए इम्पा ने कहा है कि हिंदी फिल्मों को भी महाराष्ट्र में उसी तरह की आर्थिक सहायता और सहूलियतें मिलनी चाहिए जैसी मराठी फिल्मों को मिलती रही है। महाराष्ट्र में मराठी फिल्में बनाने वालों को अनुदान के साथ साथ मुंबई फिल्मसिटी में शूटिंग के समय किराये में भी छूट मिलती है। साथ ही, इम्पा ने फिल्म उद्योग को वे सारी सहूलियतें देने की भी मांग की है जो किसी भी दूसरे उद्योग को महाराष्ट्र सरकार देती रही है।

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शूटिंग - फोटो : फाइल
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में सबसे अहम मसला शूटिंग के दौरान होने वाले उपद्रव का भी है। मुंबई फिल्म उद्योग में कर्मचारियों के अपने तमाम संगठनों के अलावा तकरीबन हर राजनीतिक दलों के संगठन भी बन चुके हैं, ये संगठन अक्सर कलाकारों और तकनीशियनों का हितैषी होने का दम भरते हुए शूटिंग स्थल पर पहुंच जाते हैं और शूटिंग रुकवा देते हैं। इम्पा का कहना है कि इस बारे में सरकार को विधिसम्मत कदम उठाने चाहिए और अराजक तत्वों से निर्माताओं को सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
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शूटिंग - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
पत्र में एक अहम मुद्दा सरकारी विभागों के बीच अहं के टकराव के चलते बाधित होने वाली शूटिंग का भी है। ये आम बात है कि मुंबई के किसी सार्वजनिक स्थल पर शूटिंग करना बहुत मुश्किल है। इसके लिए इतने विभागों की अनुमति आवश्यक होती है कि फिल्म निर्माता दूसरे राज्यों या शहरों में जाकर ही शूटिंग करने को सुगम मान लेता है। इम्पा ने इससे बचने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को एक सिंगल विंडो पॉलिसी शुरू करने की सलाह भी दी है।

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