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Meezaan Jafri Interview: भंसाली सर ने कहा भीड़ में खड़े हो जाओ, बस मैं बन गया रणवीर सिंह का बॉडी डबल

Wed, 27 Sep 2023 12:41 PM IST
दीक्षा पाठक अमर उजाला ब्यूरो
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मीजान जाफरी और हंगामा 2 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अपने जमाने के दिग्गज अभिनेता जगदीप के पोते और जावेद जाफरी के बेटे मीजान जाफरी खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि करियर की शुरुआत से लेकर हिंदी सिनेमा के बड़े निर्देशकों के साथ काम करने का मौका मिला। आहिस्ता आहिस्ता सधे कदम अपनी अभिनय यात्रा को जारी रखते हुए मीजान अपने दादा और अपने पिता जावेद जाफरी से मिले सबक हर मोड़ पर याद रखते हैं। उनके सामने दो दिग्गजों की विरासत संभालने की जिम्मेदारी है और चुनौती इस बात की है कि वह इन दोनों से अलग पहचान कैसे बना पाते हैं। मीजान से एक खास बातचीत।
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जगदीप जाफरी और मीजान जाफरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

शुरुआत आपके दादा जगदीप से करते हैं, उनको याद करते हैं तो उनका कौन सा किरदार तुरंत जेहन में घूम जाता है?
'हमारा नाम सूरमा भोपाली ऐसे ही नही है', तो है ही। प्रियदर्शन की एक फिल्म 'मुस्कुराहट' आई थी जिसमें दादा जी और अमरीश पुरी जी थे। यह फिल्म प्रियदर्शन सर की पहली हिंदी फिल्म थी। इस फिल्म का एक-एक सीन मुझे बहुत पसंद है। फिल्म में उनका डायलॉग और किरदार मुझे बहुत अच्छा लगा था। वैसे तो 'अंदाज अपना अपना', 'कालिया', जैसी बहुत सारी फिल्में हैं। हर फिल्म में उन्होंने एक अनोखा किरदार पेश किया है। दादा जी को लेकर किसी एक का चुनाव करना बहुत मुश्किल हो जाता हैं।

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जावेद जाफरी और मीजान जाफरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

पिता जावेद जाफरी की कौन सी फिल्म सबसे पहले देखी आपने?
डैडी की पहली फिल्म 'मेरी जंग' थी। इस फिल्म में उनका डांस और किरदार मुझे बहुत पसंद आया। सुभाष जी (सुभाष घई) ने डैडी के किरदार को बहुत ही खूबसूरती से पेश किया था। इस फिल्म में डैडी ने जो डांस किया था, उससे मुझे बहुत प्रेरणा मिली थी। इस फिल्म का गीत 'जिंदगी हर कदम' अपने आप में जबर्दस्त हिट सांग है।  डैडी पर फिल्माया गीत 'बोल बेबी बोल रॉक-एन-रोल' भी मेरा सबसे पसंदीदा गाना हैं। इसमें डांस का एक अलग ही स्टाइल देखने को मिला था। इस गीत को डैडी ने भी किशोर कुमार के साथ गाया था।     

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मीजान जाफरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

रियल लाइफ में भी कभी अपने डैडी को डांस करते देखा है?
कई बार! बचपन में उनके शोज में जाया करते थे। इसके अलावा हमारा कोई पारिवारिक कार्यक्रम होता था तो डैडी डांस करते थे। उनके डांस से प्रभावित होकर मैं अपने डांस में जान डालने की कोशिश कर रहा हूं। मेरी कोशिश यही रहती है कि डैडी की तरह कुछ अलग डांस करने की कोशिश करूं। 

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मीजान जाफरी और जगदीप जाफरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

जब आप दादा जी के साथ बैठते थे तो किस तरह की बातें होती थी?
हमारी फिल्मों से ज्यादा इंसानियत पर बातें होती थी। दादा जी अपने अनुभव बताते थे कि किस तरह उनके जमाने में  लोगों के अंदर इंसानियत थी और लोग एक दूसरे की मदद करते थे। आजकल तो ऐसा कम ही देखने को मिलता है। दादा जी सिखाते  थे कि कैसे अपने आपको एक अच्छा इंसान बनाना है। सामने वाले को बराबरी का दर्जा देते हुए उसके साथ अच्छे से पेश आओ। उनका कहना था कि आप एक्टर तो रहोगे ही, लेकिन एक अच्छा इंसान बनना बहुत जरूरी है। दादा जी सिर्फ परिवार के साथ ही वक्त बिताना पसंद करते थे।

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मीजान जाफरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' में आपने रणवीर सिंह के बॉबी डबल का काम किया। यह काम करने किए किस तरह से आप राजी हुए और वह सीन क्या था?
मैं उस फिल्म में सहायक निर्देशक था। एक दिन रणवीर सिंह शूटिंग पर नहीं आ पाए थे भीड़ में उनका एक लॉन्ग शॉट लेना था, तो उनकी जगह मैं खड़ा हो गया था। संजय लीला भंसाली सर मेरे गुरु हैं, वह सीन शूट करना उस दिन जरूरी था तो मैंने कर दिया। भंसाली सर के साथ सहायक निर्देशक के तौर पर फिल्म 'बाजीराव मस्तानी' से ही जुड़ गया था। जब आप सहायक निर्देशक के तौर पर काम कर रहे होते हैं तो आपकी जिम्मेदारी बनती है कि अपने निर्देशक के निर्देश का पालन करे। जब भंसाली सर ने कहा कि भीड़ में खड़े हो जाओ तो मैने बिना कुछ सवाल किए उनके निर्देश का पालन किया।

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मीजान जाफरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अक्सर देखा गया है कि फिल्मी परिवारों के बच्चे अभिनय में आने से पहले निर्देशन की बारीकियों को समझते हैं, ऐसा क्यों?
मेरे हिसाब से निर्देशन की बारीकियां  सीखना बहुत जरूरी है। मुझे ऐसा लगता है कि जिसको भी एक्टर बनना है, उसे इस दौर से जरूर गुजरना चाहिए। जब आप सेट पर होते हैं, तो बहुत सारी चीजें सीखने को मिलती हैं। जब आप एक्टिंग कर रहे होते हैं तो आप अकेले नहीं होते हैं। फिल्म के अलग -अलग डिपार्टमेंट की अलग -अलग टीम होती है। जब आप सहायक निर्देशक के तौर पर काम करते हैं, तो सारे डिपार्टमेंट के बारे में जानने को मिलता है, जो आपके एक्टिंग में काम आता है।

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फिल्म मलाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

और इन्ही फिल्मों की शूटिंग के दौरान संजय लीला भंसाली की पारखी नजर आप पर पड़ी होगी। फिर आपको फिल्म 'मलाल' में बतौर हीरो लांच किया?
हो सकता है शूटिंग के दौरान उनको ऐसा अनुभव हुआ होगा कि मैं फिल्म 'मलाल'' में शिवा मोरे का किरदार निभा सकता हूं। मैं अपने आपको काफी भाग्यशाली मानता हूं कि भंसाली सर ने मुझे लांच किया। हर किसी का सपना होता है, भंसाली सर के निर्देशन में काम करने की। मेरे तो करियर की शुरुआत ही भंसाली सर की फिल्म के साथ हुई। इस फिल्म के बाद दूसरा बड़ा मौका प्रियदर्शन सर की फिल्म 'हंगामा 2' में मिला।

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हंगामा 2 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

'हंगामा 2' में प्रियदर्शन के साथ काम करने के अनुभव कैसे रहे?
वह तो मेरे लिए इतना बड़ा मौका था कि प्रियदर्शन सर के  साथ मुझे काम करने का मौका मिल रहा था।  मेरे लिए  बड़ी बात थी। मुझे बिल्कुल भी घबराहट नही थी, में तो पूरा एंजॉय कर रहा था। प्रियदर्शन सर के अलावा राजपाल यादव, परेश रावल, आशुतोष राणा, जॉनी लीवर, शिल्पा शेट्टी के साथ भी काम करने का मौका मिला,  यह अपने आप में बहुत बड़ी बात थी। 'मलाल' के बाद यह मेरी दूसरी फिल्म थी। हर फिल्म के साथ यही कोशिश करता हूं कि जितना हो सके कुछ ना कुछ सीखने को मिले।

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मीजान जाफरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

परेश रावल से आपने क्या सीखा?
'हंगामा 2' फिल्म 'मलाल' से यह काफी अलग फिल्म थी। जब परेश रावल सर के साथ काम कर रहा था. तो उन्होंने मुझे समझाया था कि संवाद बोलते समय आवाज और टोन को कैसे मैच करना है? उन्होंने बताया कि तुमको ऐसा लगेगा कि तुम ओवर एक्टिंग कर रहे हो, लेकिन फिल्म के हिसाब से वह ठीक रहेगा। 'यारियां 2' में बॉडी लैंग्वेज और किरदार काफी अलग है। 'यारियां 2' के बाद नाना पाटेकर के साथ 'सस्पेक्ट' और संजय गुप्ता की 'मिरिंडा बॉयज' आएगी। नाना पाटेकर के साथ काम करके बहुत कुछ सीखने को मिला। वह मुझे बताते थे कि किस डायलॉग में कहां दम लेना है, कैसे बोलना है? उनके साथ फिल्म में काम करना एक चैलेंज भी था।

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यारियां 2 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

'यारियां 2' के बारे में बताएं, किस तरह से इस फिल्म से जुड़ना हुआ?
डेढ़ साल हो गया, इस फिल्म की शूटिंग करके। इस फिल्म के लिए हमने बहुत मेहनत की है। इस फिल्म में मैंने शिखर रंधावा का किरदार निभाया है। उसका अपना एक अतीत है। वह बहुत तकलीफो से गुजरा है। उनका न कोई दोस्त है ना ही परिवार का कोई सदस्य है सिवाय उसके कजिन के। इस फिल्म के लिए मुझे खुद ही भूषण कुमार ने फोन किया था। उन्होंने बताया कि एक खूबसूरत फिल्म बना रहा रहे हैं जिसका शीर्षक 'यारियां 2' है लेकिन इस फिल्म का 'यारियां' से कुछ भी लेना देना नहीं हैं।

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