हिंदी फिल्म जगत में कुछ नायाब कलाकार ऐसे हुए हैं जिन्हें सिनेमा का आधार माना जाता है। इसमें दिग्गज कलाकार गुरु दत्त का नाम शामिल है जिन्हें सिनेमा मेकिंग स्कूल की तरह देखा जाता है। गुरु दत्त ने जैसी फिल्में बनाईं और कीं उससे आज तक कलाकार कोई ना कोई सीख लेते रहते है। सिनेमा की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को भी उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। गुरु दत्त एक लेखक, निर्देशक, अभिनेता और फिल्म निर्माता भी थे। उन्होंने 'कागज के फूल', 'प्यासा', 'मिस्टर एंड मिसेज 55', 'बाज', 'जाल', 'साहिब बीबी और गुलाम' जैसी कई शानदार फिल्में दी थी।
ऐसी कटी थी गुरु दत्त की आखिरी रात
गुरु दत्त ने करियर में बहुत कुछ हासिल किया था लेकिन अफसोस की बात है कि उनका नाम भी उन कलाकारों में शामिल है जिनके मौत की कहानी एक रहस्य बनकर रह गई। गुरु दत्त का 39 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था और उनकी मौत आत्महत्या थी। उनकी मौत की एक रात पहले की क्या कहानी थी इसका जिक्र उनके दोस्त और उनकी ज्यादातर फिल्मों के लेखक अबरार अल्वी ने अपनी किताब टेन ईयर्स विद गुरु दत्त में किया था।