गुरु दत्त
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जब वो उनके घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि गुरु दत्त कुर्ता-पायजामा पहने पलंग पर लेटे हुए थे। पलंग की बगल की मेज पर एक गिलास रखा हुआ था जिसमें एक गुलाबी तरल पदार्थ अभी भी थोड़ा बचा हुआ था। अबरार के मुंह से निकला, गुरु दत्त ने अपने आप को मार डाला है। लोगों ने पूछा आप को कैसे पता? अबरार को पता था, क्योंकि वो और गुरु दत्त अक्सर मरने के तरीकों के बारे में बातें किया करते थे। गुरु दत्त ने ही उनसे कहा था, 'नींद की गोलियों को उस तरह लेना चाहिए जैसे मां अपने बच्चे को गोलियां खिलाती है...पीस कर और फिर उसे पानी में घोल कर पी जाना चाहिए।' अबरार ने बाद में बताया कि उस समय हम लोग मजाक में ये बातें कर रहे थे। मुझे क्या पता था कि गुरु दत्त इस मजाक का अपने ही ऊपर परीक्षण कर लेंगे।