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Gulshan Kumar Mehta: कलम से गीत नहीं भावनाएं व्यक्त करते थे गुलशन कुमार मेहता, पहले गाने से ही दिखाई थी फनकारी

Wed, 12 Apr 2023 10:39 AM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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गुलशन बावरा - फोटो : amar ujala
गुलशन कुमार मेहता हिंदी सिनेमा के ऐसे गीतकार थे, जो अपने गीतों में भावनाएं व्यक्त करते थे और अपने भावपूर्ण गीतों से कई श्रोताओं का मन मोह लेते थे। गुलशन कुमार को 'गुलशन बावरा' के नाम से जाना जाता था। उन्होंने हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक कई सुपरहिट गाने दिए, जिन्होंने कई लोगों के दिल को छुआ। आज गुलशन का जन्मदिवस है। चलिए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें...
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गुलशन कुमार मेहता - फोटो : Social media
गुलशन कुमार मेहता का जन्म 12 अप्रैल 1937 को पाकिस्तान के लाहौर से 30 किलोमीटर दूर शेखपुरा नाम के गांव में हुआ था। उनके परिवार का निर्माण व्यवसाय था। विभाजन के दौरान हुए दंगों में गुलशन ने अपने माता-पिता और चचेरे भाई के पिता की हत्या देखी थी, जिसका दर्द ताउम्र उनके गीतों में देखने को मिला। छोटी उम्र में ही सिर से माता-पिता का साया उठने के बाद गुलशन और उनके भाई को उनकी बड़ी बहन ने पाला। गुलशन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया, जहां कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने कविता लिखनी शुरू कर दी थी। कविताएं लिखने का शौक उन्हें बचपन से ही था।

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गुलशन कुमार मेहता - फोटो : Social media
कॉलेज के दिनों से ही गुलशन अपना करियर फिल्म इंडस्ट्री में बनाना चाहते थे। दिल्ली में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह मुंबई आ गए और एक क्लर्क की नौकरी करने लगे। नौकरी करते हुए ही उन्होंने फिल्मों में अपने लिए काम ढूंढना शुरू कर दिया। एक बार कल्याणजी-आनंदजी ने गुलशन को 'चंद्रसेना' का एक गाना लिखने का मौका दिया। फिर क्या था, गुलशन ने इस मौके को बिना गंवाए 'मैं क्या जानू, कहां लागे ये सावन मतवाला रे' गाना लिखा और गीतकार के तौर पर अपनी पहचान बना ली।

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गुलशन कुमार मेहता - फोटो : Social media
गुलशन कुमार के अद्भुत गीत लिखने की कला और काम के प्रति दृढ़ता को देख कई लोग हैरान थे। फिल्म 'सट्टा बाजार' के दौरान शांति भाई पटेल ने गुलशन के काम से खुश होकर उन्हें 'बावरा' उपनाम दे दिया था, जिसके बाद से वह गुलशन बावरा के नाम से पहचाने गए।

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गुलशन कुमार मेहता - फोटो : Social media
गुलशन कुमार मेहता ने अपने मिश्री से भी मीठे गीतों से लगभग तीन दशकों तक श्रोताओं को मनमोहित किया। उन्होंने कई सदाबहार गाने हिंदी सिनेमा को दिए। उन्होंने फिल्म 'जंजीर' के गाने 'यारी है ईमान मेरा' और 'उपकार' के गाने 'मेरे देश की धरती सोना उगले' के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार भी जीता था। सात अगस्त 2009 को वह इस दुनिया को अलविदा कह गए।

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