गोविंदा
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गोविंदा ने कहा, 'कुछ समय पहले यहां सिर्फ उन लोगों को काम मिलता था जो हुनरमंद होते थे। हर फिल्म को सिनेमाघरों में बराबरी का दर्जा दिया जाता था। लेकिन, आज के समय में कुछ चार-पांच लोग ही हैं जो इस पूरे व्यापार पर तानाशाही करते हैं।'