फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुण्यतिथि विशेष: गुलाम मोहम्मद की किस्मत- अनुबंध करने गए तो बंद हो गया थिएटर, शोहरत हासिल होने से पहले हो गई थी मृत्यु

Thu, 17 Mar 2022 01:04 PM IST
वर्तिका तोलानी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 5
लता मंगेशकर और गुलाम मोहम्मद - फोटो : सोशल मीडिया

भारतीय फिल्म स्कोर संगीतकार गुलाम मोहम्मद हाजन सायरा की आज 54वीं पुण्यतिथि है। मिर्जा गालिब (1954), शमा (1961) और पाकीज़ा (1972) जैसी सुपरहिट फिल्मों में बेहतरीन संगीत देने वाले गुलाम मोहम्म्द की किस्मत आर. डी. बर्मन की ही तरह थी। हमेशा गुमनामी की जिंदगी जीने वाले संगीतकार को जब सफलता मिलने वाली थी तभी उनकी मृत्यु हो गई। 

विज्ञापन

2 of 5
गुलाम मोहम्मद - फोटो : सोशल मीडिया

राजस्थान के बीकानेर में जन्मे गुलाम महम्मद अपने पिता की ही तरह एक कुशल तबला वादक थे। संगीतकार ने छह साल की उम्र में ही न्यू अल्बर्ट थिएट्रिकल कंपनी के साथ काम करना शुरू कर दिया था। लेकिन किस्मत ने ऐसा खेल खेला कि जब 25 रुपये महीने के लिए अनुबंध करने जा रहे थे, तभी वित्तीय कठिनाइयों की वजह से थिएटर बंद हो गया। 

विज्ञापन

3 of 5
गुलाम मोहम्मद - फोटो : सोशल मीडिया
1924 में गुलाम मोहम्मद अपना करियर बनाने के लिए बॉम्बे आ गए। आठ सालों तक महानगरी में संघर्ष करने के बाद, 1932 में उन्हें सरोज मूवीटोन'स प्रोडक्शंस की "राजा भृतहरि" में तबला बजाने का मौका मिला। यहां से गुलाम मोहम्मद की किस्मत चमकी और उन्हें करदार प्रोडक्शंस के प्रसिद्ध संगीत निर्देशक नौशाद का सहायक बनने का अवसर मिला। फिल्म संगीतकार अनिल विश्वास के साथ 12 साल से अधिक समय तक काम करने के बाद, गुलाम मोहम्मद ने फिल्म 'टाइगर क्वीन' (1947) में स्वतंत्र रूप से संगीत की रचना की।

4 of 5
गुलाम मोहम्मद - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म मिर्ज़ा ग़ालिब (1954) के संगीत का निर्देशन करने के लिए गुलाम मोहम्मद को 1955 में राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बावजूद उद्योग में हर कोई उन्हें अनिल विश्वास के सहायक के रूप में ही पहचानता था। ऐसे में अपनी पहचान बनाने के लिए गुलाम मोहम्मद ने फिल्म पाकीज़ा (1972) साइन की। हालांकि फिल्म की रिलीज़ से पहले ही 17 मार्च 1968 को उनकी मृत्यु हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
गुलाम मोहम्मद - फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, गुलाम मोहम्मद की आखिरी फिल्म पाकीज़ा (1972) में अभिनेत्री मीना कुमारी मुख्य भूमिका निभा रहीं थी। लेकिन फिल्म निर्माता कमाल अमरोही और मीना कुमारी के बीच वैवाहिक और व्यक्तिगत समस्याओं के कारण कई वर्षों तक फिल्म की शूटिंग अटकी रही। अंततः गुलाम मोहम्मद की मृत्यु फिल्म पाकीज़ा के रिलीज से पहले हो गई। बता दें कि फिल्म पाकीज़ा में उनका संगीत स्कोर अभी भी भारतीय सिनेमा में सर्वकालिक महान संगीत स्कोर माना जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें