भोजपुरी फिल्मों में गायिकी से लेकर अभिनय और राजनीति तक पहुंचकर सफलता पाने वाले मनोज तिवारी ने जीवन में कई उतार चढ़ाव देखे। मनोज तिवारी को बचपन से ही गायिकी का बड़ा शौक था। अपने इसी शौक के चलते उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों से ही गायन शुरू कर दिया था। मनोज ने हिंदी में एम ए बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से किया है। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए मनोज कहते हैं कि उन्हें चार किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना और प्लेटफॉर्म पर सोना सब याद आता है।
मनोज ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि वे साल 1998 में अपने गांव से बनारस आए थे। यहां आने के बाद उनके पास कोई घर नहीं था। मनोज बताते है कि उन्होंने अपने दोस्तों के साथ वहां कई घर देखे। इस दौरान काफी मुश्किल से बनारस में कौशलेस नगर में एक घर मिला। लेकिन, उस वक्त वो घर बना हुआ नहीं था। ऐसे में अपने कार्यकम में व्यस्त रहने वाले मनोज को जब भी वक्त मिलता वह मजदूरों के साथ घर को बनवाने में लग जाते थे।