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'हीना' से 'बहू बेगम' तक पर सिमोन सिंह ने की अमर उजाला से बातचीत, इन दो बड़ी फिल्मों में आएंगी नजर

Mon, 22 Jul 2019 10:15 PM IST
Avinash Pal मुंबई टीम, अमर उजाला
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सिमोन सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
छोटे परदे पर हीना सीरियल को आए दो दशक से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब भी इसमें लीड किरदार करने वाली अभिनेत्री सिमोन सिंह कहीं भी जाती हैं तो इसे लेकर उनसे बात जरूर होती है। सिमोन इन दिनों प्रसारित हो रहे सीरियस बहू बेगम को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। उनसे एक खास मुलाकात।
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Simone Singh - फोटो : file photo
आपके हिसाब से अच्छी कहानियों की पहचान क्या होती है? 
मेरे हिसाब से अच्छी कहानियों का असर यही होता है कि उनके किरदार लोगों के जेहन में बस जाते हैं। बचपन में सुनी तमाम कहानियां भी हमें इसीलिए याद रह जाती हैं क्योंकि उनमें हम अपने जैसा कुछ ढूंढने कामयाब रहते हैं। लेकिन, जमाना बदलता है तो किरदार भी बदलते हैं। हीना से लेकर बहू बेगम तक महिलाओं की सोच में बदलाव आया है, जमाने से मुकाबला करने का उनका हौसला बढ़ा है और हमें भी अपने आसपास ऐसी महिलाओं का समर्थन करना चाहिए जो अपने बूते कुछ कर दिखाने की मशक्कत कर रही हैं।
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Simone Singh - फोटो : file photo
आप जगह जगह जाती हैं, दुनिया घूमती हैं तो इसका एक अभिनेत्री के तौर पर आप पर क्या असर होता है?
किसी एक दायरे में बंधकर आरामदायक जिंदगी बिताते रहना इंसान के विकास में बाधा बनता है। मेरे हिसाब से अलग अलग प्रांतों के लोगों से मिलना काफी लाभदायक साबित होता है। उनके अलग अलग अनुभवों से काफी सीख भी मिलती है। सिर्फ उनसे बात करने के बाद एक नए तरह की ऊर्जा महसूस होती है। 

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Simone Singh - फोटो : file photo
आप इतने लंबे समय से टीवी से जुड़ी रही हैं, आपके नजरिए से क्या बदलाव आया है भारतीय टेलीविजन में कंटेंट को लेकर?
मैं अक्सर सोचती हूं तो मुझे लगता है कि अच्छे और बुरे हर तरह के बदलाव एक ही मात्रा में हुए हैं। कुछ बदलावों ने टीवी पर दिखाए जाने वाले कंटेंट की गुणवत्ता बढ़ाई है। पर वहीं जिस तरह का काम आज होता है और जितनी मेहनत अभिनेताओं, लेखकों और निर्माताओं को करनी पड़ती है, उसका प्रभाव भी कंटेंट की गुणवत्ता पर पड़ता है। पहले सभी सीरियलों की कहानी एक जैसी और साधारण हुआ करती थी पर आज नई नई कहानियां हैं, और उनके प्रदर्शन में भी काफी बदलाव आया है, इससे मैं बेहद खुश हूं। पर कुछ बदलाव ऐसे भी हैं जो अच्छे नहीं हैं।
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Simone Singh - फोटो : file photo
और, ओटीटी का क्या असर पड़ा है?
अभी एक नया दौर शुरू हुआ है ओटीटी का। इस वेब प्लेटफॉर्म ने ही नई नई तरह की शैलियां और कहानियों की पेशकश को बढ़ावा दिया है। अब हर तरह के दर्शक अपनी अपनी पसंदीदा शैलियां अनुसार चयन कर सकते हैं। ये बेहद अच्छी बात है। वहीं कलाकारों और तकनीशियनों के लिए यह सबसे अच्छा समय है, इतने सारे माध्यमों के चलते अब काम का आभाव नहीं है। लेकिन, किसी भी नए के पीछे पागलों की तरह दौड़ पड़ना भी सही नहीं है। काम उतना ही करना चाहिए जितने में आपकी मानसिक शांति में खलल न पड़े। मैं टीवी से इसीलिए दूर हुई। इसमें काम करना बहुत ही थका देने वाला होता है। एक कलाकार को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। 
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Simone Singh - फोटो : file photo
आप हर नया प्रोजेक्ट करने से पहले लंबी छुट्टी पर जाती हैं, इसकी कोई खास वजह?
मेरा मानना है कि कोई बड़ा काम शुरू करने से पहले आपको खुद को शारीरिक रूप से जरूर तैयार होना चाहिए। कोई भी नया प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले मैं तो लंबी छुट्टियां लेती हूं। इसके अलावा मैं यह भी कहती हूं कि इंसान को अपनी सोच का पक्का होना चाहिए। अगर हम दूसरों के दबाव में अपने फैसले बदलते रहते हैं तो फिर अपने जैसा कुछ हो नहीं पाएगा। मुझे भी किसी किरदार को करवाने के लिए खूब मनाना पड़ता है। इतनी आसानी से मैं किसी भी किरदार के लिए हामी नहीं भरती। मैं कई बार अपने नए प्रोजेक्ट्स के बीच काफी समय खाली बिताती हूं। मुझे बहुत सारा काम करने का जुनून नहीं है। मैं वही करती हूं जो मुझे पसंद आता है। लेकिन जब एक बार हां करदेती हूं  उसके बाद किसी की भी नहीं सुनती। अपने मन की भी नहीं।
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Simone Singh - फोटो : file photo
आप अपने अब तक के करियर को कैसा सबक मानती हैं?
जीवन अनुभवों की पोथी होती है। हर अनुभव हमारे लिए एक सबक होता है। ये कैसा भी हो सकता है अच्छा या बुरा। तो अगर जीवन में आपके साथ कुछ बुरा हुआ है तो उससे घबराना नहीं चाहिए। हर हादसा हमें कुछ न कुछ सिखाकर जरूर जाता है। इस पेशे में मेरी मुलाकात तमाम लोगों से होती है। लेखकों से किरदारों के नजरिये समझती हूं। निर्देशकों से इन्हें जीने का तरीका समझती हूं। हम कभी पूरे नहीं होते। लेकिन खुद को भीतर से बहुत खाली भी नहीं रखना चाहिए। कुछ न कुछ, कहीं न कहीं से भरते रहना होता 
है। 
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सिमोन सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
बहू बेगम के बाद अपने चाहने वालों के लिए आप क्या लेकर आ रही हैं?
अभी मैंने इम्तियाज अली की आजकल पूरी की, मुझे बहुत अच्छी लगी ये प्रेम कहानी। फिर, सैफअली खान की लाल कप्तान याद करती हूं तो अलग अनुभव याद आता है। बदलते रहना ही एक ऐसी चीज है जीवन में जो निश्चित होती है, और इस पर सबको यकीन करना ही चाहिए।
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