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बच्चों पर बनी ये 10 फिल्में समाज को दिखाती हैं आईना, सोचने पर मजबूर कर देगी इनकी कहानी

Tue, 27 Apr 2021 09:33 AM IST
अमरीन हुसैन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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बॉलीवुड फिल्म्स - फोटो : Social media
बॉलीवुड इंडस्ट्री ने एक लंबा सफर तय कर लिया है। इस दौरान बॉलीवुड ने कई सुपरस्टार दिए हैं और तरह-तरह की फिल्में। यहां हर वर्ग का ख्याल रखा गया है। रंग-बिरंगी और बोल्ड फिल्मों के बीच बच्चों व स्टूडेंट के लिए भी कहानियां बुनी गईं। इन फिल्मों ने बच्चों का मनोरंजन किया तो दूसरी ओर सभी को गंभीर संदेश भी दिया। आज हम ऐसी ही कुछ मूवीज का जिक्र करेंगे, जिन्हें खासतौर पर स्टूडेंट्स को ध्यान में रखकर बनाया गया।
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तारे जमीन पर - फोटो : Social Media
तारे जमीन पर
इस फिल्म के लिए आमिर खान के हौंसले की प्रशंसा की जानी चाहिए कि उन्होंने अपने निर्देशन में बनी पहली फिल्म ‘तारे जमीन पर’ एक बच्चे को केन्द्र में रखकर बनाई और बिना बॉक्स ऑफिस की चिंता किए पर्दे पर उतारा। इस फिल्म के जरिए उन्होंने बच्चों के भीतर झांकने की कोशिश की। फिल्म आठ साल के ईशान दर्शील सफारी की कहानी बताती है, जो मानसिक रूप से अपने परिवार के लिए पीड़ित होता है। बच्चे की पहचान शिक्षक रामशंकर निकुंभ करते हैं। फ़िल्म को लोगों ने काफी पसंद किया था।
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चिल्लर पार्टी - फोटो : Social media
चिल्लर पार्टी
चिल्लर पार्टी एक बच्चों के गैंग की कहानी है जो बहुत मासूम हैं। उन्हें कोई चिंता नहीं है और मस्त जिंदगी जीते हैं। चंदन नगर कॉलोनी में ये सब रहते हैं। जल्दी ही इनका गैंग में फटका और भीड़ू भी शामिल हो जाते हैं और इनकी दोस्ती अधिक मजबूत हो जाती है। बच्चों की टीम में तब समस्या उत्पन्न हो जाती है, जब भीड़ू की जिंदगी एक नेता की वजह से खतरे में आ जाती है। ये घबराते नहीं हैं और मिलकर लड़ने का फैसला करते हैं। फिल्म ये साबित करती है कि छोटे बच्चे चाहें तो किसी को भी धूल चटा सकते हैं।

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स्टेनली का डब्बा - फोटो : Social Media
स्टेनली का डब्बा
इस फिल्म में फोकस चौथी क्लास के बच्चों पर है। कक्षा में स्टेनली बहुत ही बुद्धिमान और मेहनती है और पूरे क्लास के बच्चों का चहीता भी। स्टेनली किसी वजह से अपना टिफिन नहीं ला पाता। उधर हिंदी के टीचर वर्माजी बच्चों के खाने पर नीयत लगाए रहते हैं। बच्चे अपने टिफिन से स्टेनली को तो खिलाना चाहते हैं, पर वर्मा सर को नहीं। पूरी फिल्म का सार यही है कि शिक्षक ने दूसरे के टिफिन में से खाने पर बच्चे को डांट लगाकर भगाया और अब खुद वही कर रहे हैं। बड़ों की कथनी और करनी के अंतर को बच्चे बहुत साफ तरीके से देखते और महसूस करते हैं।
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फरारी की सवारी - फोटो : Social media
फरारी की सवारी
इस फिल्म को खेल के दृष्टिकोण से बनाया गया है। रूसी के बेटे कायो का सपना है कि वह एक दिन बड़ा क्रिकेट खिलाड़ी बनेगा। आरटीओ में क्लर्क होने के बावजूद रूसी के पास पैसे की तंगी हमेशा बनी रहती है। क्योंकि, वह ईमानदार रहता है। पैसे की तंगी के बीच जूझकर हताशा में वह कहता है कि हम जैसे लोगों को तो सपने नहीं देखने चाहिए। बेटे के सपने को पूरा करने की जद्दोजहद में वह न चाहते हुए भी गलत काम कर बैठता है, जिसके कारण कई परेशानियों से घिर जाता है।
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बम बम बोले - फोटो : Social media
बम बम बोले
बम बम बोले वर्ष 2010 में रिलीज बॉलीवुड ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन प्रियदर्शन ने किया है। फिल्म में दर्शील सफारी, जिया वास्तानी, अतुल कुलकर्णी, ऋतुपर्णा सेनगुप्ता आदि मुख्य भूमिका में नजर आये थे। फिल्म की कहानी दो भाई-बहन के ऊपर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक गरीब मां बाप के बच्चे होशियार होते हैं और परिवार के दुख में अच्छा साथ निभाते हैं।
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तहान - फोटो : Social media
तहान
फिल्म एक युवा लड़के और उसके पालतू गधे के जीवन पर आधारित है। आठ वर्षीय तहान अपने दादा, मां और बहन के साथ कश्मीर में रहता है। ये सब इस आशा के साथ जी रहे हैं कि एक दिन तहान के पिता लौटकर आएंगे। उसके दादा की मौत के बाद जमींदार उनके परिवार की संपत्ति ले लेते हैं। इसके साथ ही तहान का गधा बीरबल भी ले जाते हैं क्योंकि, तहान के परिवार ने उनसे कर्ज लिया था। बीरबल के बिना तहान का जीना मुश्किल हो जाता है। उसकी जिंदगी अब एकमात्र उद्देश्य बीरबल को वापस लाना है।

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नील बट्टे सन्नाटा
निल बटे सन्नाटा
यह फिल्म गरीब मां-बेटी पर आधारित है। मां घरों में काम करती है ताकि बेटी पढ़ लिखकर नाम कमाए, मगर बेटी सोचती है कि जो मां करती है वह भी वही करेगी। मां अपनी बेटी के मर चुके ख्वाब को जिंदा करने के लिए जी-जान लगाती है। यह फिल्म बताती है कि सपनों का मर जाना सबसे खतरनाक होता है और इंसान के सपनों के मर जाने से बड़ा कोई दर्द नहीं होता। इसमें स्वरा भास्कर ने सराहनीय अभिनय किया है।

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Slumdog Millionaire - फोटो : Social media
स्लमडॉग मिलेनियर
यह पिक्चर झोपड़पट्टी में रहने वाले लोगों पर फिल्माई गई है, जो दो भाइयों के इर्द-गिर्द घूमती है। वो बचपन में दंगों के दौरान अनाथ और बेघर हो गएl थे। दोनों ने तरह-तरह के बुरे लोगों और कई मुश्किलों का सामना किया। फिल्म में दिखाया गया हैै कि गलत रास्ते पर चलने वाले का अंजाम हमेशा गलत ही होता है।

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आई एम कलाम - फोटो : सोशल मीडिया
आई एम कलाम
यह फिल्म छोटू नाम के 12 साल के बुद्धिमान लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है। गरीबी और अभाव में रहने के बावजूद छोटू हर तरह के हालातों से प्रसन्नतापूर्वक जूझता है। अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए उसे सड़क के किनारे छोटे से होटल में काम करता है और शाम को पढ़ाई करता है। एक दिन छोटू भारत के राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को टेलीविजन पर देखता है और उनसे काफी प्रेरित होता है। वह अपना नाम बदलकर कलाम रख लेता है और यह निश्चय करता है कि वह एक ऐसा व्यक्ति बनेगा जो टाई पहनता है और जिसका दूसरे लोग सम्मान करेंगे।
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फिल्म इकबाल - फोटो : Social media
इकबाल
यह फिल्म एक गूंगे और बहरे लड़के की कहानी है, जो भारतीय क्रिकेट टीम के लिए क्रिकेट खेलने का सपना देखता है। उसके पास कोई सुविधा नहीं होती। उसके पिता भी उसके क्रिकेट खेलने का बहुत विरोध करते है, लेकिन वह हार नहीं मानता और अपने सपने को पूरा करके रहता है।
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