शबाना आजमी
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शबाना ने साल 1983, 1984 और 1985 में लगातार तीन वर्षों तक पुरस्कार जीता। उन्होंने स्वामी (1977), जूनून (1979), स्पर्श (1980), अर्थ (1982), (1983) और पार (1984) कुछ यादगार फिल्में कीं। शबाना ने साल 1984 में जावेद अख्तर से शादी की। जावेद, शबाना आजमी के पिता कैफी आजमी से लिखने का हुनर सीखने के लिए जाते थे। इसी दौरान शबाना और जावेद अख्तर एक दूसरे के करीब आए गया और उन्हें एक-दूसरे से प्यार हो गया। हालांकि, शबाना का परिवार इस शादी के खिलाफ था। इसकी वजह जावेद अख्तर का पहले से ही शादीशुदा होना था। जावेद की पहले से ही हनी से शादी हो चुकी थी और उनके दो बच्चे थे। लेकिन शबाना ने घर वालों की मर्जी के खिलाफ जाकर जावेद अख्तर से शादी की। उन्होंने परिवार से अपने प्यार के लिए बगावत कर दी थी।