त्रिशूल
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
चलते चलते...
येसुदास, लता मंगेशकर और किशोर कुमार भारतीय संगीत की तीन अनमोल धरोहरें हैं। तीनों ने एक साथ बस एक ही बार गाना गाया और वह गाना है फिल्म ‘त्रिशूल’ का गाना, मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है। अमिताभ के नाम पूरी फिल्म में बस इसी गाने का एक अंतरा आया। सलीम जावेद ने पहले फिल्म ‘ज़ंजीर’, फिर ‘दीवार’, उसके बाद ‘शोले’ और फिर फिल्म ‘त्रिशूल’ में अमिताभ बच्चन के भीतर सुलगते गुस्से को अपना हथियार बनाया और नाच गाने से उन्हें दूर रखा। एक ऐसी इमेज जिसने अमिताभ को एंग्री यंगमैन का नाम दिया। ‘शोले’ में भी अमिताभ बस होली सॉन्ग में ज़रा देर को ठुमके लगाते हैं और महफ़िल लूट लेते हैं। सलीम जावेद का करिश्मा कुछ था ही ऐसा। हालांकि उनको महारत हासिल थी पहले से मौजूद फिल्मी कहानियों को नया तड़का लगाकर पेश करने में। ओरीजनल की फिल्मी दुनिया को समझ नहीं है, ये बात दोनों को बहुत पहले पता चल गई थी। उसके बाद से वह फिल्म निर्माताओं को वही सुनाते जो उनकी समझ के स्तर का हो और जिसका रेफरेंस उनकी कहीं न कहीं जरूर मिल सके। ध्यान से फिल्म देखेंगे तो फिल्म ‘त्रिशूल’ की कहानी में आपको साल 1968 में रिलीज हुई ‘इज्ज़त’ की कहानी मिल जाएगी।
(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।)