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Bioscope S2: ये हैं शर्मिला टैगोर को हिंदी सिनेमा में लाने वाले राइटर, हिट का रिकॉर्ड आज तक कायम

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सचिन भौमिक - फोटो : अमर उजाला मुंबई
हिंदी सिनेमा में कपूर खानदान के सबसे कामयाब सितारे रहे ऋषि कपूर से बातें करने की यूं तो तमाम यादें हैं लेकिन एक बातचीत जो हमारे बीच काफी देर तक हुई और जिसे मैं कभी भूल नहीं सकता, वह बातचीत थी पटकथा लेखक सचिन भौमिक को लेकर। सचिन दा आज जीवित होते तो 97 साल के हो गए होते। वह अपनी लिखी फिल्मों के जरिये आज भी अपने प्रशंसकों के करीब हैं। और, शायद आपको पता न हो लेकिन सलीम जावेद की जोड़ी से भी पहले उन्होंने हिंदी सिनेमा में लेखकों का रुतबा कायम किया था। वह हिंदी सिनेमा के सबसे कामयाब पटकथा लेखक माने जाते हैं। 50 साल तक हिंदी फिल्में लिखने वाले भी वह इकलौते राइटर रहे और शर्मिला टैगोर तो उन्हें ही हिंदी फिल्मों में खुद को लाने का क्रेडिट आज भी देती हैं।
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सचिन भौमिक ऋषि कपूर और अन्य लोगों के साथ - फोटो : अमर उजाला मुंबई
जब ऋषि कपूर ने माना एहसान
 
17 जुलाई 1930 को पैदा हुए सचिन भौमिक उन गिनती के लोगों में रहे जो फिल्मवालों के बीच रहकर भी कभी फिल्मी नहीं हुए। 12 अप्रैल 2011 को जब उनके न रहने की खबर आई तो उस फिल्म इंडस्ट्री में भी आधे से ज्यादा लोगों को इसका पता न था जिसके लिए उन्होंने सबसे ज्यादा सिल्वर जुबली फिल्में लिखीं। उन दिनों मैं ‘नई दुनिया’ अखबार का महाराष्ट्र हेड हुआ करता था और सचिन भौमिक के निधन का समाचार पाते ही सबसे पहला मैसेज मैंने ऋषि कपूर को किया। ऋषि कपूर ने संदेशे का जवाब देने की बजाय सीधे खुद ही मुझे फोन कर दिया। एक सुपरस्टार को एक राइटर को अपनी कामयाबी का क्रेडिट देते हुए सुनना ही एक अलग अनुभव था। ऋषि कपूर ना जाने कितनी देर तक उनके बारे में बातें करते रहे, बतौर हीरो अपने करियर के दूसरे ही साल में उन्हें फिल्म ‘खेल खेल में’ मिली थी और इसकी पटकथा पढ़ते पढ़ते ही ऋषि कपूर को इसके राइटर के टैलेंट की पहचान हो गई थी। ऋषि कपूर ने तब कहा था, “सचिन दा ने मेरे करियर को जो दिशा और दशा दी, उसका एहसान मैं कभी उतार नहीं पाऊंगा। वह जमाने के साथ चलने वाले राइटर थे। आप ही सोचिए जो राइटर मुखराम शर्मा और अख्तर उल इमान के दौर में आया हो और ऋतिक रोशन के टाइम तक फिल्में लिख रहा हो, उसमें कुछ तो ऐसा होगा ही ना। इस बीच में कितने बड़े बड़े दिग्गज राइटर आए और चले गए। कितने राइटर होंगे यहां मुंबई में जिन्होंने 50 साल तक फिल्में लिखीं? हिट फिल्में लिखीं। सुपरहिट फिल्में लिखीं।” कहना ऋषि कपूर का बिल्कुल सही था। ‘खेल खेल में’ के बाद सचिन भौमिक की लिखी जिन फिल्मों में ऋषि कपूर ने शोहरत और दौलत दोनों पाई, उनमें शामिल रहीं, ‘हम किसी से कम नहीं’, ‘कर्ज़’, और ‘जमाने को दिखाना है’।
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सचिन भौमिक - फोटो : अमर उजाला मुंबई

सुभाष घई के साथ चला लंबा साथ

सचिन भौमिक की लिखी फिल्म ‘कर्ज’ से ही उनका रिश्ता निर्माता निर्देशक सुभाष घई से भी जुड़ा। और, ये रिश्ता ‘कर्मा’ और ‘ताल’ जैसी फिल्मों से होता हुआ ‘युवराज’ तक कायम रहा। घई जिन्होंने खुद भी हिंदी सिनेमा में बतौर राइटर ही अपने करियर की शुरुआत की थी, सचिन भौमिक के लेखन के जबर्दस्त फैन रहे। उनके मुताबिक, ‘सचिन भौमिक के पास रिश्तों को पहचानने की एक अद्भुत कला थी। वह कहानी लिखते समय भी इसका ध्यान रखते थे। उनकी फिल्में ठेठ कमर्शियल सेटअप में इंसानी जज्बात का सैलाब ले आती थीं। कहते हैं कि सिनेमा वही सुपरहिट होता है जो दर्शकों के दिल के करीब हो। और, सचिन भौमिक को हिंदी सिनेमा के दर्शकों की नब्ज बहुत सही तरीके से पता हो गई थी। यही वजह रही कि वह हिंदी सिनेमा के, मैं समझता हूं. सबसे कामयाब राइटर बने।’ सचिन भौमिक मुंबई के सबसे बड़े सितारों की रिहाइश वाले इलाके बांद्रा में रहते थे। वहीं अपने घर पर ही उन्होंने आखिरी सास भी ली। घर पर हमेशा एक सूती लुंगी और बनियान में मिलने वाले सचिन भौमिक ने दिखावे से खुद को हमेशा दूर रखा। सादा जीवन उच्च विचार वाले सचिन भौमिक हर तरह का सिनेमा देखते थे। दुनिया भर की जानकारी उनको होती। वह ‘आराधना’ भी उसी चाव से लिखते जिस चाव से ‘गोलमाल’।

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आराधना - फोटो : अमर उजाला मुंबई

शर्मिला टैगोर को हिंदी सिनेमा में लाए

कम लोगों को ही पता होगा कि फिल्म ‘आराधना’ में शर्मिला टैगोर की कास्टिंग सचिन भौमिक के कहने पर ही हुई। शर्मिला टैगोर के भौमिक परिवार से घर जैसे ताल्लुकात रहे। वह बताती हैं, ‘घुमक्कड़ी उनके डीएनए में थी। बहुत घूमते थे। और जहां जाते थे वहां के बारे में लिखते थे। एक बार उन्होंने लिखा शहर देखना है तो धीरे ड्राइव करो, जेल देखनी हो तो रफ्तार से। ये लाइन मेरे जेहन में अटक गई। मेरी मां को करीब से जानते थे और उन्होंने ही शक्ति सामंत को मुझे फिल्म ‘आराधना’ में लेने क लिए राजी किया था। मेरे ख्याल से शक्ति सामंत उन दिनों इस फिल्म में हेमा मालिनी को लेने का विचार कर रहे थे जिनकी पहली हिंदी फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ उन दिनों हिट हो चुकी थी।’

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आराधना - फोटो : अमर उजाला मुंबई
दशक दर दशक, हिट पर सुपरहिट

1958 में फिल्म ‘लाजवंती’ से शुरू हुआ सचिन भौमिक का राइटिंग करिअर फिल्म ‘अनुराधा’ से रफ्तार में आया। इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। और, इसके बाद ‘आई मिलन की बेला’, ‘जानवर’, ‘लव इन टोकयो’, ‘आये दिन बहार के’, ‘ऐन इवनिंग इन पेरिस’, ‘ब्रह्मचारी’, ‘आया सावन झूम के’ और ‘आराधना’ जैसी हिट फिल्मों ने उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का उस दशक में राइटर नंबर वन बना दिया, जब सलीम जावेद का दूर दूर तक पता नहीं था। सलीम जावेद आए और आकर चले गए। लेकिन सचिन भौमिक की जगह पहले जैसी ही बरकरार रही। बीती सदी के आठवें दशक में सचिन ने ‘आन मिलो सजना’, ‘कारवां’, ‘बेईमान’, ‘दोस्त’, ‘खेल खेल में’, ‘हम किसी से कम नहीं’ और ‘गोलमाल’ जैसी फिल्में लिखीं। ‘गोलमाल’ जैसी फिल्म सचिन भौमिक ने उस दौर में लिखी जब परदे पर एंग्री यंगमैन का अवतार हो चुका था, लेकिन अमोल पालेकर और उत्पल दत्त की इस फिल्म ने उस दौर में भी बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
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आराधना का पोस्टर, सचिन भौमिक - फोटो : अमर उजाला मुंबई

राजेश और शर्मिला को लेकर बनाई राजा जानी

इसके बाद के बरसों में सचिन भौमिक ने ‘कर्ज’, ‘दो और दो पांच’, ‘बेमिसाल’, ‘जमाने को दिखाना है’, ‘नास्तिक’, ‘अंदर बाहर’, ‘साहेब’ और ‘कर्मा’ जैसी सुपरहिट फिल्में लिखीं। बीती सदी के आखिरी दशक में सचिन भौमिक की लिखी जिन फिल्मों की चर्चा आज भी होती है, वे हैं, ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘ये दिल्लगी’, ‘करण अर्जुन’, ‘कोयला’, ‘सोल्जर’, ‘आ अब लौट चलें’ और ‘ताल’। और, नई सदी में न्यू मिलेनियल्स की पसंद के हिसाब से लिखी ‘कोई मिल गया’ और ‘कृष’ का इतिहास तो सबको पता ही है। यशराज फिल्म्स की पिक्चर ‘ये दिल्लगी’ के निर्देशक नरेश मल्होत्रा ने इस फिल्म की मेकिंग के बारे में चर्चा करने पर बताया था, ‘सचिन दा कमाल के राइटर थे। शूटिंग के समय वह मौजूद रहते और हमेशा निर्देशक की मदद के लिए तैयार रहते। आप उनसे किसी सीन का एक वैरिएशन मांगो, वह दर्जन भर ऑप्शन के साथ तैयार रहे। इतने दिग्गज लेखक होने के बावजूद निर्देशक के प्रति उनका रवैया तारीफ करने लायक होता। डायरेक्टर पहली बार फिल्म बना रहा होता या दसवीं बार, वह हमेशा उसे इज्जत देते।’ सचिन भौमिक ने राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर को लेकर खुद भी एक फिल्म डायरेक्ट की थी, ‘राजा जानी’।

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सचिन भौमिक और आर डी बर्मन - फोटो : अमर उजाला मुंबई

चलते चलते...

सचिन भौमिक की शख्सीयत कोई रूआबदार आभामंडल वाले फिल्मी शख्स की नहीं थी। वह सेट पर भी लोगों में घुले मिले से ही दिखते। उनकी ऐनक उनकी पहचान होती और इसी ऐनक के नजरिये पर इंडस्ट्री कुर्बान रहती है। उन्होंने अलग अलग दौर के अलग अलग तरीकों की फिल्में बनाने वाले निर्देशकों संग लंबी पारी खेली। ऋषिकेश मुखर्जी के लिए तो उन्होंने 10 फिल्में लिखीं। प्रमोद चक्रवर्ती के साथ भी उनका स्कोर करीब करीब इतना ही रहा। बप्पी सोनी, नासिर हुसैन, सुभाष घई, जे ओम प्रकाश और उनके दामाद राकेश रोशन के साथ भी उनका लंबा साथ रहा। इन सारे निर्देशकों के लिए उन्होंने पांच पांच फिल्मे लिखी हैं। सचिन भौमिक के खाते में 94 फिल्मों के नाम हैं, और इनमें से तमाम सिनेमाघरों में सिल्वर जुबली मनाने में कामयाब रहीं।

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