जाबांज
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
जब सलीम खान के साथ घूमे फिरोज
साल 1972 में फिल्म ‘अपराध’ से फिरोज खान निर्देशक बने और उनकी इसके बाद बनी अगली दोनों फिल्में ‘धर्मात्मा’ और ‘कुर्बानी’ भी सुपरहिट फिल्में रहीं। ‘कुर्बानी’ ने फिरोज खान को इतनी दौलत दी कि उनके पास की तिजोरियां ये कमाई रखने के लिए कम पड़ गईं। लोग बताते हैं कि वह पहले फिल्म निर्माता और निर्देशक थे, जिन्होंने सिर्फ नोट गिनने के लिए अलग से एक टीम रखी हुई थी। उनके बंग्लुरु फार्म हाउस पर जिन्हें भी जाने का मौका मिला है, वे जानते हैं कि फिरोज खान ने उन दिनों कैसे दोनों हाथों से दौलत लुटाई और उन्हें भी जानते हैं जिन्होंने खूब जतन करके ये दौलत लूटी भी। फिल्म ‘कुर्बानी’ में फिरोज खान का हर दांव बिल्कुल सही पड़ा था। फिल्म ब्लॉकबस्टर थी। फिल्म का म्यूजिक उससे भी बड़ा हिट था। और, फिरोज खान को अब एक नई तरह का सिनेमा अपने सपनों में दिखने लगा था। इस सिनेमा में परंपरागत कहानियों की कोई जगह नहीं थी। सलीम-जावेद वाले सलीम खान को वह अपने साथ विदेश घुमाने ले गए। दोनों कोई महीना भर साथ घूमे। विदेश के बार देखे, पब देखे, अय्याशी के वे सारे मुकाम देखे, जहां फिरोज खान अपनी एक ऐसी फिल्म देख रहे थे, जिसे वह इंटरनेशनल मार्केट में रिलीज कर सकें। वह ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे जो हिंदी में देसी दर्शकों की पसंद के हिसाब से बने और अंग्रेजी में बने तो ऐसे दृश्यों के साथ कि हॉलीवुड को भी मात कर दे। ‘कुर्बानी’ 1980 में रिलीज हुई और अगले छह साल तक फिरोज खान ने इतने रंग बदले कि फिल्म इंडस्ट्री हैरान हो गई। लोग समझ ही नहीं पा रहे थे कि फिरोज खान असल में करना क्या चाह रहे हैं।