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पुण्यतिथि: 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम...' आज भी अमर, लिखने वाले भरत को भूल गया 'भारत'

Sun, 04 Jul 2021 11:52 AM IST
दीपाली श्रीवास्तव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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भरत व्यास - फोटो : सोशल मीडिया
हिंदी सिनेमा में ऐसे तमाम लोग आए और गए जिन्होंने अपना खास योगदान दिया। फिर चाहे वो अभिनेता, अभिनेत्री या कोई गीतकार। लेकिन फिल्म इंडस्ट्री की बुरी बात ये है कि ये लोगों को भूल जाती है। आज हम ऐसे बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा को अमर गीत देने वाले भरत व्यास के बारे में। आज की पीढ़ी ने शायद ही भरत व्यास का नाम सुना होगा। लेकिन उनके गाने जरूर सुने होंगे। अगर गाने भी नहीं सुने तो उनकी लिखी एक प्रार्थना आपने स्कूल में जरूर गाई होगी। 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम...' जी हां, स्कूल में सुबह ये प्रार्थना आपने कभी न कभी जरूर सुनी या गाई होगी। इसे गीतकार भरत व्यास ने ही लिखा था। भरत व्यास का जन्म 6 जनवरी 1918 में राजस्थान के बीकानेर में हुआ था और आज ही के दिन 4 जुलाई 1982 को वो दुनिया से अलविदा कह गए थे। आज भरत व्यास की पुण्यतिथि के दिन हम आपको उनके बारे में कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं।

बीकानेर से मुंबई का सफर
भरत व्यास के माता-पिता का निधन उनके बचपन में ही हो गया था। उसके बाद वो अपने चाचा के यहां रहने लगे थे। भरत व्यास का परिवार तब आर्थिक रूप से ज्यादा मजबूत नहीं था। उनके चाचा जनार्दन व्यास ने यहां रतन बिहारी पार्क के पास एक रेस्टोरेंट खोला था। इस रेस्टोरेंट में भरत व्यास काम करते थे। काफी समय काम करने के बाद भरत व्यास का मन उखड़ गया। तब वो एक पुस्तक में गीत लिखते थे। भरत के एक चाहने वाले उन्हें बीकानेर से मुंबई ले गए। वहां उनके गीत लोगों को खूब पसंद आए। 
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भरत व्यास - फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है भरत व्यास की कलम में वो जादू था कि वो हर वक्त, हालात और किसी पर गीत लिख सकते थे। जब उनके बेटे उनसे नाराज हुए तो उन्होंने दो गाने लिखे। जो आज भी हिंदी सिनेमा में गुनगुनाए जाते हैं। ये गाने थे...'आ लौट के आजा मेरे मीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं, मेरा सूना पड़ा रे संगीत, तूझे मेरे गीत बुलाते हैं।' दूसरा था...'जरा सामने तो आओ छलिये छुप-छुप छलने में क्या राज है।' यूं तो भरत व्यास ने तमाम हिंदी फिल्मों के लिए गाने लिखे। लेकिन उनकी एक प्रार्थना अमर हो गई और इसे पढ़ते वक्त फिल्म के निर्देशक ने भी कहा था कि ये अमर होगी। ये प्रार्थना वही थी 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हो हमारे करम...नेकी पर चले और बदी से टले ताकि हंसते हुए निकले दम...'  वी. शांताराम फिल्म दो आंखे बारह हाथ बना रहे थे। उन्होंने भरत व्यास से एक प्रार्थना लिखने के लिए बोला तो एक प्रार्थना लिखी गई। 
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भरत व्यास, वी. शांताराम - फोटो : सोशल मीडिया
वी. शांताराम ने कहा कि भरत इसे दोबारा लिखो, ये प्रार्थना ऐसी हो कि हर धर्म का बंदा गा सके। भरत व्यास ने घर जाकर रात भर में एक प्रार्थना लिखी और अगले दिन वी. शांताराम को दे दी। इस प्रार्थना की पहली पंक्ति पढ़कर ही वी.शांताराम ने कह दिया कि ये प्रार्थना अमर होगी और वही हुआ।

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भरत व्यास - फोटो : सोशल मीडिया
सिर्फ हिंदी सिनेमा ने ही नहीं बल्कि भरत व्यास को उनके जिला बीकानेर ने ही भुला दिया। भरत व्यास ने अपने हर परिचय में बीकानेर का नाम लिया। उनका परिवार मूल रूप से चूरू का है लेकिन बीकानेर को ही उन्होंने जिया था। सिर्फ बीकानेर ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान का नाम रोशन करने वाले भरत व्यास को सरकार ने भी कभी याद नहीं किया। कई बड़े कलाकारों के नाम से पुरस्कार दिए जाते रहे हैं, लेकिन भरत व्यास के नाम से कभी कोई अवार्ड तक नहीं दिया गया।
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भरत व्यास, किशोर कुमार - फोटो : सोशल मीडिया
भरत व्यास ने पृथ्वीराज कपूर, लक्ष्मीकांत प्यारे लाल, वी. शांताराम, मुकेश, मोहम्मद रफी जैसी हस्तियों के साथ काम किया है। भरत व्यास अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों में भी बीकानेर को याद करते रहे। वो कहीं भी अपना परिचय देते तो कहते थे कि मैं मूल रूप से चूरू का हूं लेकिन जन्म बीकानेर में हुआ। वहीं रहा, वहीं पढ़ा। लेकिन अफसोस की उन्हें आज कोई याद नहीं करता। 
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