फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'आदमी के पास दिमाग हो तो वो दर्द भी बेच सकता है', मोगैंबो के 10 ऐसे डायलॉग, जिसे भूलना मुश्किल

Fri, 22 Jun 2018 07:48 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 10
बॉलीवुड के सुपर विलेन कहे जाने वाले दिग्गज कलाकार अमरीश पुरी का जन्म 22 जून साल 1932 में पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था। फिल्मों में अमरीश पुरी का विलेन किरदार कई हीरों पर भारी पड़ता दिखा, लेकिन 12 जनवरी 2005 को 72 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। फिल्मों में दमदार अभिनय और बेहतरीन डायलॉग के लिए अमरीश पुरी को कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका है। उनके डायलॉग आज तक कई दिलों की धड़क हैं। आइए एक नजर उनके बेहतरीन डायलॉग पर...
विज्ञापन

2 of 10
1. टिप बाद में देना तो एक रिवाज है, पहले देना अच्छी सर्विस की गारंटी होती है।

अमरीश पुरी का यह डायलॉग अमिताभ बच्चन की फिल्म 'शहंशाह' का है। 
विज्ञापन

3 of 10
2. मैं तो समझता था कि दुनिया में मुझसे बड़ा कमीना और कोई नहीं है, 
 लेकिन तुमने एेन मौके पर ऐसा कमीनापन दिखाया कि हम तुम्हारे कमीनेपन के गुलाम हो गए हैं। 


यह डायलॉग सलमान खान और शाहरुख खान की फिल्म 'करण-अर्जुन' का है। इस फिल्म में अमरीश पुरी ने बेहतरीन विलेन की भूमिका निभाई थी। 

4 of 10
3. आदमी के पास दिमाग हो तो अपना दर्द भी बेच सकता है।

अमरीश पुरी का यह डायलॉग अक्षय कुमार, प्रियंका चोपड़ा और करीना कपूर स्टारर फिल्म 'एतराज' का है। 
विज्ञापन

5 of 10
4. मोगैंबो खुश हुआ
अमरीश पुरी का यह डायलॉग आज भी कई लोगों को याद होगा। यह डायलॉग अनिल कपूर की सुपरहिट फिल्म 'मिस्टर इंडिया' का है।
विज्ञापन

6 of 10
5. ये अदालत है, कोई मंदिर या दरगाह नहीं जहां मन्नतें और मुरादें पूरी होती हैं
यहां धूप बत्ती और नारियल नहीं,बल्कि ठोस सबूत और गवाह पेश किए जाते हैं।


अमरीश पूरी का यह डायलॉग सन्नी देओल के सुपरहिट फिल्म 'दामिनी' का है। 
विज्ञापन

7 of 10
6. गलती एक बार होती है, 
दो बार होती है, तीसरी बार इरादा होता है


यह डायलॉग फिल्म 'इरादा' का है। 

8 of 10
7. अपनी किसी प्यारी चीज पर
जब चोट का एहसास लगता है तो
दिल में दर्द जाग उठता है


अमरीश पूरी का यह डायलॉग अजय देवगन की फिल्म 'फूल और कांटे' का है। 

9 of 10
8.दुनिया की नजर में मरे हुए लोग कभी जिंदा नहीं हुए
नहीं तो जिंदगी परेशान हो जाती।


अमरीश पूरी का यह डायलॉग ऋषि कपूर की फिल्म 'दीवाना' का है। 
विज्ञापन

10 of 10
9.नए जूतों की तरह शुरू में नए अफसर भी काटते हैं।

यह डायलॉग फिल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' का है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें