'बाहुबली 2' के रिलीज हुए आज दो साल पूरे हो गए हैं । 'बाहुबली 2' में वही सारे किरदार नजर आए जो इसके पहले भाग में थे। बस एक किरदार का अंत 'बाहुबली: द बिगनिंग' में ही हो गया था । ये किरदार था फिल्म का खूंखार विलेन कालकेय का । कालकेय का रोल बाहुबली के पहले भाग में बहुत महत्वपूर्ण था, जिसे खत्म कर दिया गया था ।
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बाहुबली
आज हम आपको बताते हैं कि 'बाहुबली' का ये खूंखार विलेन कौन है । कालकेय ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे । दर्शकों ने जब बाहुबली के इस विलेन को देखा होगा तब उनके मन में ये ख्याल आया होगा कि ये किसी दूसरे देश का है । लेकिन ऐसा नहीं है, कालकेय का असली नाम प्रभाकर है। प्रभाकर साउथ के जाने-माने एक्टर हैं।
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प्रभास बाहुबली से पहले फिल्म 'मर्यादा रमन्ना' से लाइम लाइट में आए थे। बाहुबली में उन्हें बहुत ही क्रूर और भयानक दिखाए गया लेकिन असल जिंदगी में वो बहुत शर्मीले हैं। प्रभाकर महबूबनगर जिले के एक छोटे से गांव कोडंगल के रहने वाले हैं। एक इंटरव्यू के दौरान प्रभाकर ने बताया था कि वो कभी फिल्मों में काम नहीं करना चाहते थे।
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प्रभाकर ने कहा था, 'मुझे बचपन से क्रिकेट खेलने का शौक था। मैं क्रिकेटर बनने का सपना देखता था। 12वीं पास करने के बाद एक बार मैं शादी अटेंड करने के लिए हैदराबाद आया। मेरी पर्सनैलिटी देखकर वहां मुझसे एक रिश्तेदार ने वादा किया कि वो मेरी जॉब रेलवे पुलिस में लगवा देंगे।'
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इसके बाद प्रभाकर ने इस जॉब का 6 साल तक इंतजार किया लेकिन उनकी जॉब नहीं लगी। प्रभाकर हैदराबाद में ही जॉब तलाश कर रहे थे तभी उन्हें पता चला कि डायरेक्टर एसएस राजामौली को फिल्म 'मगधीरा' के लिए कुछ लोगों की जरूरत है। मेरा दोस्त मुझे वहां ले गया जहां सिलेक्शन हो रहा था। राजामौली ने उन्हें देखा लेकिन कुछ बोले नहीं।
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प्रभाकर ने बताया, 'वहां से राजामौली मुझे राजस्थान ले गए। राजस्थान में मगधीरा की शूटिंग चल रही थी। वहां थोड़ा-बहुत काम मैंने देखा। फिर हैदराबाद लौटकर जॉब ढूंढने लगा। एक दिन मुझे राजामौली के असिस्टेंट का फोन आया। वो मुझे उनके घर लेकर गया। वहां राजामौली ने मुझसे कहा कि उनके पास मेरे लिए फिल्म मर्यादा रमन्ना में एक रोल है।'
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जब प्रभाकर ने कहा कि मुझे एक्टिंग नहीं आती तब राजामौली ने उन्हें देवदास कनकला में एक्टिंग सीखने के लिए भेजा। राजामौली प्रभाकर को हर महीने 10 हजार रुपए स्टाइपेंड देते थे। इन पैसों से प्रभाकर ने अपना सारा कर्ज चुका दिया। प्रभाकर ने बताया था कि राजामौली ने उन्हें नया जीवन दिया। वो आज जो कुछ भी हैं वो राजामौली के कारण ही हैं।
मर्यादा रमन्ना के बाद प्रभाकर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब उन्होंने एक के बाद एक 40 फिल्में कर ली हैं। इसमें 'सीमा तपकई', 'डूकुडु', 'कृष्णम वंदे जगदगुरुम जैसी फिल्में शामिल हैं। बाहुबली के विलेन के लिए प्रभाकर से अच्छा और कोई हो ही नहीं सकता था। बाहुबली के अन्य किरदारों की तरह कालकेय ने इस फिल्म में कभी ना भूलने वाली अदाकारी की। इस फिल्म में प्रभाकर ने अपनी मातृभाषा बोली है।