पुलवामा हमले के बाद से ही देश में शोक की लहर कायम है। देशवासी जहां शहीदों के लिए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं तो वहीं दुश्मनों के लिए कड़ी कार्रवाई की मांग भी कर रहे हैं। ऐसे में अभिनेता अनुपम खेर और आयुष्मान खुराना ने शहीदों को समर्पित करते हुए एक कविता लिखी है। दोनों अभिनेताओं की कविता में जवानों के बीच प्रबल देशभक्ति की भावना और उनकी निडर बहादुरी को पेश किया गया है।
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ayushman khurana
देश का हर जवान बहुत खास है,
है लड़ता जब तक श्वास है,
परिवारों के सुखों का कारावास है,
शहीदों की माओं का अनंत उपवास है,
उनके बच्चों को कहते सुना है
पापा अभी भी हमारे पास हैं
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anupam kher
वहीं, अनुपम ने लिखा, "मुझे यह कविता एक मैसेज के तौर पर मिली. यह एक जवान की जिंदगी की तुलना एक आम आदमी की जिंदगी से करती है। इसने मुझे भावुक कर दिया और इस बात का अहसास करा दिया कि सेना और जवानों के बलिदान को यूं ही मान लेना कितना आसान है।' अनुपम द्वारा अंग्रेजी भाषा में पढ़ी गई इस कविता का हिंदी अनुवाद नीचे दिया गया है.
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अनुपम खेर
- फोटो : SELF
तुमने डिग्री के लिए तैयारी की और मैंने सबसे कड़ी ट्रेनिंग की, तुम्हारा दिन 7 बजे शुरू होता और 5 बजे खत्म हो जाता और मेरा सुबह 4 बजे शुरू होकर रात 9 बजे तक चलता रहता, इसमें कुछ रातें भी शामिल होती थीं, तुम्हारी अपनी कॉनवोकेशन सेरेमनी होती थी और मुझे मेरी पीओपी में हिस्सा लेना होता, तुम्हें बेस्ट कंपनी ने हायर किया और सबसे अच्छा पैकेज मिला, मुझे मेरी पलटन मिली और 2 सितारे मेरे कंधे पर लगाए गए.
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anupam kher
अनुपम ने आगे पढ़ा, "तुम्हें नौकरी मिली और मुझे जिदंगी जीने का एक नया तरीका, हर शाम तुम अपने परिवार से मिलते और मैं ये दुआ करता कि जल्द ही अपने परिवार से मिल पाऊंगा, तुम रौशनी और संगीत के साथ त्यौहार मनाते और मैं अपने साथियों के साथ बंकर में पड़ा रहता, शादियां हम दोनों ने ही की थीं, तुम्हारी पत्नी तुम्हें रोज देख पाती और मेरी ये दुआ करती कि मैं सलामत रहूं,
कविता की अगली लाइनें पढ़ते हुए अनुपम ने कहा, 'तुम्हें बिजनेस ट्रिप्स पर भेजा जाता और मैं लाइन ऑफ कंट्रोल पर रहता, हम दोनों ही वापस लौट आए. दोनों की ही पत्नियां अपने आंसू नहीं रोक सकीं. लेकिन तुमने उसे गले लगाया और उसके आंसू पोछ दिए..... लेकिन मैं नहीं कर सका।'