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MCCC: मुकेश छाबड़ा कास्टिंग कंपनी ने पूरा किया सीतापुर के युवक का सपना, विशाल भारद्वाज की फिल्म में मिला रोल

Sat, 11 Dec 2021 04:41 PM IST
अपूर्वा राय अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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अनुभव दीक्षित और मुकेश छाबड़ा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ की इसकी प्रगतिशील कहानी के अलावा जिस एक और चीज के लिए काफी तारीफ हो रही है, वह है इसकी कास्टिंग। फिल्म में आयुष्मान के दोस्तों से लेकर उसके परिजनों और वाणी कपूर के घरवालों व रिश्तेदारों की कास्टिंग कमाल की है। मुंबई के चर्चित इलाके आराम नगर के वर्सोवा से जुड़ने वाले कोने पर कास्टिंग निर्देशक मुकेश छाबड़ा के दफ्तर से इन सारे कलाकारों की कास्टिंग हुई है। और, इस बार इसी दफ्तर तक हम पहुंचे ये देखने कि आखिर रिश्तेदारों और सगे संबंधियों को ही काम देने का लगातार आरोप झेलने वाली हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बाहर से आने कलाकारों को काम कैसे मिलता है? हमें यहां मिले सीतापुर से आए अनुभव दीक्षित जिन्हें मुकेश छाबड़ा कास्टिंग कंपनी ने हाल ही में विशाल भारद्वाज की एक मल्टीस्टारर फिल्म में मौका दिया है। आगे की कहानी अनुभव दीक्षित की जुबानी...
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मुकेश छाबड़ा कास्टिंग कंपनी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
“मुकेश छाबड़ा कास्टिंग कंपनी ने मेरे उस सपने को सच कर दिया है जो मैंने मुंबई आने से पहले दिल्ली में देखा था। ये बात 2014 की है जब मुझे करियर की दूसरी फीचर फिल्म के ऑडीशन के लिए डायरेक्टर दिनकर राव ने अपने फ्लैट पर बुलाया। ऑडीशन लेने के बाद उन्होंने मुझ से कहा, आपको अब तक मुंबई मे होना चाहिए था। उस वक्त मैने उन से कहा कि कुछ सीख तो लूं जो मुंबई जाने लायक बन सकूं। उसके बाद वक्त बीतता गया और मैं टेलीविजन धारावाहिकों में खास भूमिकाएं निभाने वाला खास कलाकार बनता चला गया।”
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अनुभव दीक्षित - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
“धारावाहिकों में काम शुरू करने से पहले तो खास सपोर्ट मुझे कहीं से नहीं मिला। लेकिन जैसे जैसे मेरा काम लोग देखते गए। घर मोहल्ले में मेरी बातें शुरू हुईं तो सबको लगा कि मैं अभिनय को लेकर वाकई गंभीर हूं। मेरी बड़ी बहन ने मुझे मुंबई जाने के लिए उत्साहित किया औऱ मेरे जीजा अशोक शुक्ला ने मेरी आर्थिक हालत देखकर मुंबई जाने का मेरा टिकट बुक करा दिया। उज्जैन में महाकाल से मिलते हुए मैं मुंबई पहुंचा और यहां खूब धक्के खाए। मुंबई में ऑडीशन देने के पहले दिन ही एक जगह मैं अचानक अनुराग कश्यप से भी टकरा गया। उन्हें देख कर मेरे मन में यही ख्याल आया कि बाहर के लोग आकर भी यहां अपनी जगह बना सकते हैं। बस, समय थोड़ा ज्यादा लगेगा और मेहनत दूसरों से ज्यादा करनी पड़ेगी।”

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अनुभव दीक्षित - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
“अभिनय में अपना करियर बनाने वालों को मैं अब भी यही सलाह देता हूं कि इसके लिए रंगमंच से बढ़िया कोई पाठशाला नहीं है। लाइनें याद करने में, देह के भाव और इसकी भंगिमाएं कैमरे के सामने सही रखने में मुझे रंगमंच से बहुत मदद मिली। सुनील रावत और महेंद्र मेवाती इस मामले में मेरे पथ प्रदर्शक बने। और बीते पांच साल से मैं लगातार थिएटर करता आ रहा हूं। अपने पिताजी के नाम पर मैंने अपना अलग पुष्कर थिएटर ग्रुप भी बनाया है। मुकेश छाबड़ा कास्टिंग कंपनी में मेरे ऑडीशन नियमित होते हैं और मैंने कभी इसके लिए मना नहीं किया। मैंने देखा है कि ऑडीशन देने में ही लोग परेशान हो जाते हैं। लेकिन, एक कास्टिंग कंपनी का काम है प्रतिभाओं को पहचान कर निर्माता निर्देशकों तक पहुंचाना। इसके बाद आपका हुनर और आपका भाग्य साथ देता है।”
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अनुभव दीक्षित - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
“रंगमंच पर निरंतर अभ्यास, कला के प्रति मेरे समर्पण ने किस्मत को भी मेरे घर की कुंडी खटकाने भेज दिया है। जो सपना ले कर मै मुंबई आया था नौ साल की कड़ी मेहनत के बाद उसकी तरफ पहला कदम बढ़ाने मे मेरी मदद मुकेश छाबड़ा कास्टिंग कम्पनी ने की है। हिंदी फिल्म जगत के दिग्गज निर्माता निर्देशकों में शुमार विशाल भारद्वाज की अगली फिल्म के मुझे चुन लिया गया है। मैं चाहता हूं कि यहां तक आने वाले कलाकार हिम्मत और हौसला बनाए रखें। अभिनय एक जुनून है और शुरू में ये दो वक्त की रोटी देने की गारंटी नहीं देता। मुंबई में अगर आपके पास रहने और खाने भर के पैसे कमाने का कोई इंतजाम है तो अभिनय का संघर्ष आसान हो जाता है।”
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कुत्ते फिल्म का पोस्टर - फोटो : Instagram
“मुकेश छाबड़ा कास्टिंग कंपनी ने जिस मूवी के लिए मुझे सेलेक्ट किया है वह विशाल भारद्वाज के बेटे आसमान निर्देशित करने जा रहे हैं। मुझे ऐसा लग रहा है कि जैसे कोई मांगी हुई दुआ कुबूल हो गई है। विशाल भारद्वाज के साथ काम करने का सपना हर एक एक्टर का होता है और मेरा ये सपना अब साकार हो रहा है। आसमान भारद्वाज निर्देशित मूवी “कुत्ते” में मुझे अपना दमखम दिखाने का मौका मिला है और मेरा ये सौभाग्य है कि तब्बू और कुमुद मिश्रा जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ मुझे भी काम करने का मौका मिला। और, मेरी ये कहानी ये भी साबित करती है कि मुकेश छाबड़ा कास्टिंग कंपनी जैसे माध्यमों से हिंदी सिनेमा में बाहर के लोग भी काम पा सकते हैं। बस धैर्य जरूरी है।”
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