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बेटी के साथ काम करके 62 साल के अनिल कपूर हुए खुश, बोले- 'सब चीजें मैं थोड़ी-थोड़ी सीख रहा हूं'

Wed, 30 Jan 2019 11:43 AM IST
शिप्रा सक्सेना मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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sonam kapoor anil kapoor - फोटो : twitter
एवरग्रीन यंग अनिल कपूर और उनकी हमेशा चहकती दिखने वाली बिटिया सोनम कपूर पहली बार एक साथ बड़े पर्दे पर दिखेंगे फिल्म 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' में। दोनों से अमर उजाला ने की ये खास मुलाकात।
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अनिल कपूर - फोटो : twitter
फिल्म 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' में आपके किरदार क्या हैं?
सोनम- मेरे किरदार का नाम है। स्वीटी चौधरी और बहुत ही मासूम सी लड़की है और प्यार और दोस्ती की भूखी है।
अनिल- मैं स्वीटी चौधरी का पिता बना हूं बलबीर चौधरी। वह मोगा शहर का मुकेश अंबानी है। खाना बनाने का शौक है। स्वीटी और उसकी दादी जब सास बहू वाले शोज देखते हैं तो बलबीर कुकिंग शोज देखता है। मां और बेटे के बीच इसे लेकर काफी झगड़ा होता है।
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Anil Kapoor and Sonam Kapoor - फोटो : amar ujala
निर्देशक शैली धर चोपड़ा ने जब आपको स्क्रिप्ट सुनाई तो पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
सोनम- मुझे स्क्रिप्ट सुनकर ऐसा लगा कि इस तरह की कहानी को पहले भी बड़े पर्दे पर दर्शाया गया है पर जिस विचार को लेकर फिल्म बनी है  वह बिल्कुल नया है।
अनिल- मैं स्क्रिप्ट में ज्यादा दिमाग नहीं लगाता। मुझे अगर अपना किरदार और कहानी पसंद है तो मैं हां कर देता हूं। मैंने तो तभी हां कर दिया जब मुझे बोला गया कि फिल्म में मैं मोगा का मुकेश अंबानी हूं।

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Ek Ladki Ko Dekha Toh Aisa Laga - फोटो : amar ujala
इस फिल्म में काम करने के बाद एक दूसरे से क्या सीखने को मिला?
सोनम- मेरे हिसाब से ऐसी स्क्रिप्ट आज तक आई नहीं जिसमें मेरा और पापा का किरदार बिल्कुल सही हो। अगर मैं पापा की बात करूं तो सही में वह अब भी बड़े नहीं हुए हैं क्योंकि उनके अंदर की जिज्ञासा अभी तक कायम है। यही एक चीज मैंने पापा से सीखी।
अनिल- सोनम तो मुझे रोज सिखाती है। यह बहुत ही बहादुर है, सच्ची है और दिमागदार है। यह सब चीजें मैं इससे थोड़ी-थोड़ी ले रहा हूं। जब लोग मुझे कहते हैं कि मैं इतना फिट कैसे हूं तो मुझे लगता है कि मैं सुनता काफी अच्छा हूं।
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Ek Ladki Ko Dekha Toh Aisa Laga - फोटो : twitter
फिल्म में आप समलैंगिकता का मुद्दा उठा भी रहे हैं?
सोनम- इस मुद्दे के बारे में आपसे हम फिल्म देखने के बाद बात कर सकते हैं क्योंकि अभी हम सही-सही तरह से नहीं बता पाएंगे कि इस फिल्म का मुद्दा क्या है।
अनिल- इसका मुद्दा है प्यार का परिवार का और स्वीकारने का। हम कैसे परिवार के हर सदस्य को स्वीकारते हैं यही इस कहानी का सार है। अगर आप किसी सच्चाई को दर्शकों के सामने अच्छी और मनोरंजक तरह से पेश करते हैं तो वह भी स्वीकारते हैं।
    
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