अमिताभ बच्चन
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
पूरा नाम, विजय दीनानाथ चौहान
अमिताभ बच्चन का अपने फिल्मी जीवन का सबसे बड़ा प्रयोग थी फिल्म ‘अग्निपथ’। फिल्म के निर्देशक मुकुल आनंद को खुद अमिताभ ने बुलाकर एक ऐसी फिल्म की प्लानिंग करने को कहा था जो लीक से बिल्कुल अलग हो। अमिताभ ने उनको भरोसा भी दिया कि अगर ऐसी कोई कहानी वह ला सके तो वह फिल्म की मेकिंग में बिल्कुल हस्तक्षेप नहीं करेंगे। अमिताभ अपना सबसे ऊंचा स्टारडम जी चुके थे और फिल्म ‘मोहब्बतें’ से कमबैक करने में अब भी 10 साल से ज्यादा का वक्त बाकी था। मुकुल आनंद ने फिल्म ‘गॉडफादर’ में मर्लन ब्रांडो के प्रयोग को अमिताभ बच्चन पर दोहरा दिया। गालों में अंदर की तरफ रूई के गोले रखने को दिए गए ताकि चेहरा थोड़ा भारी लगे और आवाज़ भरभराई सी। फिल्म ‘देशप्रेमी’ अगर आपको याद हो तो उसमें अमिताभ बच्चन का एक रोल मास्टर दीनानाथ का था। कहानी ऐसी सोची गई कि अगर देश पर जान छिड़कने वाले एक मास्टर का बेटा अपराधी बन जाए तो वह क्या करेगा? अमिताभ बच्चन के पूरे करियर के वैसे तो अनगिनत संवाद लोकप्रिय रहे हैं लेकिन अमिताभ बच्चन की बोलने की स्टाइल का जब भी जिक्र आता है तो हर किसी की जुबान पर होता है तो बस एक संवाद, ‘पूरा नाम, विजय दीनानाथ चौहान, बाप का नाम दीनानाथ चौहान, मां का नाम सुहासिनी चौहान, गांव मांडवा, उमर छत्तीस साल..!’ फिल्म में अपने संवाद बोलने के लिए अमिताभ ने एक अलग शैली और एक अलग तरह की आवाज निकाली, जो आम दर्शकों को समझ नहीं आई। फिल्म फ्लॉप हो गई।