आदित्य चोपड़ा
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अपनी बात को और साफ करते हुए आदि कहते हैं, ‘हकीकत सिर्फ इतनी नहीं थी कि कहानी सुनाने के लिए ये दोनों गानों का इस्तेमाल करते हैं, बल्कि बात इससे कहीं ज्यादा गहरी थी। दरअसल दोनों हूबहू एक जैसी भावनाएं जगाते थे। रंगों की बौछार, बेहद नाटकीयता, जोशीला गायन, बेदाग डांस, एक क्लासिक कहानी, एक सुखद अंत। इसने मुझे उसी तरह की खुशियों और भावनाओं से भर दिया जो कोई भी अच्छी इंडियन फिल्म करती है। तभी मुझे एहसास हुआ कि अलग दुनिया, अलग भाषाओं के बावजूद इंडियन फिल्में और वेस्टर्न म्यूजिकल थिएटर लंबे समय से बिछड़े हुए दो प्रेमी हैं।’