चरण सिंह
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कविता ने बताया कि जो सज्जन भागकर उनके पापा को देखने आए थे, वह थुंगा हॉस्पिटल के मालिक राजेश शेट्टी थे। वह बताती हैं, “राजेश जी ने तुरंत अपने अस्पताल में फोन किया और हमारी एंबुलेंस वाले को पापा को वहां ले जाने को कहा। मुझे यूं लग रहा था कि जैसे भगवान खुद मदद करने आए हों। उन्होंने अस्पताल को एडवांस आदि लेने से भी मना कर दिया। पापा का वहां इलाज काफी दिन तक चला और अस्पताल के किसी स्टाफ ने मुझसे एक भी दिन किसी तरह का एडवांस आदि जमा करने को नहीं कहा। पापा को वहां आकर थोड़ा सुकून मिला। लेकिन, उनका जीवन चक्र ही शायद पूरा हो चुका था। सब कुछ सामान्य हो पाता उसके पहले ही वह मुझे छोड़ गए। कोरोना काल में कौन आता मेरी मदद करने, तो मैंने ही पापा का अंतिम संस्कार भी किया।”