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Pavan Malhotra Birthday: भीड़ का हिस्सा बनकर थियेटर पहुंचे थे पवन मल्होत्रा, बाद में इसी की बदौलत मिली फिल्में, खूब कमा रहे नाम

Thu, 02 Jul 2020 01:34 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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पवन मल्होत्रा - फोटो : सोशल मीडिया
सलीम लंगड़े पे मत रो, बाघ बहादुर, ब्लैक फ्राईडे, डॉन (फरहान अख्तर निर्देशित), भाग मिल्खा भाग और रूस्तम जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले अभिनेता पवन राज मल्होत्रा (Pavan Malhotra Birthday) का आज जन्मदिन है। पवन मल्होत्रा का जन्म 2 जुलाई 1958 को दिल्ली में हुआ था। चलिए पवन के जन्मदिन पर आपको बताते हैं उनके जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां...
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पवन मल्होत्रा - फोटो : सोशल मीडिया
पवन राज मल्होत्रा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से आर्ट्स में स्नातक की पढ़ाई की है। इसके बाद वह दिल्ली थिएटर से जुड़ गए। थियेटर करने के दौरान ही उन्हें सीधे टीवी दुनिया में एंट्री मिल गई। 1986 में पवन को उनका पहला शो दूरदर्शन का 'नुक्कड़' मिला जिसमें उन्होंने सईद का किरदार निभाया था। इसी शो के जरिए पवन घर-घर में पहचाने जाने लगे। पवन के पिता का मशीन टूल्स का बिजनेस था, वो ये चाहते थे कि उनकी तरह ही पवन भी बिजनेस सीखें लेकिन उन्होंने अभिनय की दुनिया अपना ली।
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पवन मल्होत्रा - फोटो : सोशल मीडिया
पवन को पहली बार साल 1984 में 'अब आएगा मजा' फिल्म में काम करने का मौका मिला मिला। इसके बाद साल 1985 में खामोश और 1989 में बाघ बहादुर जैसी नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्मों में पवन ने काम किया। इसके बाद उन्होंने कई सालों तक बतौर सहायक निर्देशक बुद्धदेव दासगुप्ता, सईद अख्तर मिर्जा श्याम बेनेगल दीपा मेहता के साथ काम किया।

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पवन मल्होत्रा - फोटो : सोशल मीडिया
पवन मल्होत्रा ने अपने फिल्मी सफर में नेगेटिव पॉजिटिव हर तरह के किरदार निभाए हैं। इसके लिए उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। फिल्मों को लेकर पवन का कहना है कि मैं फिल्म तभी करता हूं जब मेरा किरदार दमदार हो, अगर किरदार अच्छा नहीं तो मेरे लिए फिल्म का कोई मतलब नहीं है।
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पवन मल्होत्रा - फोटो : इंस्टाग्राम
इतने बेहतरीन अभिनेता होने के बाद भी पवन मल्होत्रा को लाइमलाइट में रहना पसंद नहीं है। पवन बेशक सोच-समझकर वक्त लेकर फिल्में करते हैं, लेकिन जैसे ही वो पर्दे पर आते हैं, बस छा जाते हैं। कम ही लोग जानते हैं कि पवन रिचर्ड एटनबरो की गांधी फिल्म में वॉर्डरोब असिस्टेंट रह चुके हैं। पवन बताते हैं कि उनके लिए थिएटर में जाना एक इत्तेफाक था। वह एक दोस्त के साथ थियेटर में सिर्फ भीड़ बनकर शामिल हुए थे लेकिन कौन जानता था कि आगे चलकर वह भी इसी दुनिया में रम जाएंगे।
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