फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ganesh Acharya: हिट पर हिट देने वाले गणेश आचार्य की 10 अनसुनी कहानियां, गोविंदा के इस गाने ने बदल दी किस्मत

Fri, 06 May 2022 09:25 AM IST
शशि सिंह अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विज्ञापन
1 of 11
गणेश आचार्य - फोटो : अमर उजाला

मशहूर कोरियोग्राफर गणेश आचार्य अब हीरो भी बन गए हैं। बतौर हीरो उनकी फिल्म 'देहाती डिस्को' 27 मई को रिलीज हो रही है। गणेश आचार्य का बचपन बहुत कठिन संघर्ष से गुजरा। सिनेमा का सपना उनका हमेशा उन्हें थोड़ा और संघर्ष करने के लिए प्रेरित करता रहा। गणेश आचार्य को हिंदी सिनेमा के चंद बेहतरीन गानों की कोरियोग्राफी के लिए जाना जाता है। लेकिन, उनके बारे में अब भी तमाम बातें ऐसी हैं, जो उनके प्रशंसक भी नहीं जानते। ‘अमर उजाला’ के पाठकों के लिए गणेश आचार्य खुद सुना रहे हैं अपनी राम कहानी, चलिए जानते हैं उनसे उनके जीवन के 10 अनसुने किस्सों के बारे में...

विज्ञापन

2 of 11
कोरियोग्राफर गणेश आचार्य

झोपड़पट्टी में बीता बचपन

‘मेरे पिता का ताल्लुक मद्रास है और मां यहीं महाराष्ट्र की धरती की बेटी हैं। मेरा बचपन मुंबई की सांताक्रुज पूर्व की प्रभात कालोनी कालोनी में गुजरा है। मुझे अपने बचपन के तमाम साथी अब भी याद हैं। अक्सर उनसे भेंट भी हो जाती है। इस इलाके ने ही मुझे वह बनाया जो आज मैं हूं। पढ़ना लिखना भी वहीं हुआ और जिंदगी के शुरुआती सबक भी मैंने इसी कॉलोनी में सीखे। 10 साल का था मैं जब पिताजी नहीं रहे। तभी घर की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई और ना चाहते हुए भी मुझे उस उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी।’

विज्ञापन

3 of 11
Ganesh Acharya - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
जूनियर आर्टिस्ट से शुरुआत
‘ये उन दिनों की बात है जब मैं सिनेमाघरों में जीतेंद्र, अमिताभ बच्चन और मिथुन चक्रवर्ती जैसे सितारों की होर्डिंग्स देखा करता था। 12 साल का था मैं जब मुझे पहली बार फिल्मों में काम करने का मौका मिला। ढूंढेंगे तो शायद किसी फ्रेम में दिख भी जाऊं। पहले जूनियर आर्टिस्ट बना। फिर थोड़ा बड़ा हुआ तो ग्रुप डांसर बनने का मौका मिला। 17 साल का था जब पहली बार असिस्टेंट डांस डायरेक्टर बना। और, 19 साल की उम्र मुझे डांस डायरेक्टर बनने का मौका मिल गया। सच पूछे तो मेरे पिता मिस्टर गोपी मुंबई आए थे डांस मास्टर बनने। पिता जी का सपना पूरा करते करते कोरियोग्राफी मेरी आत्मा बन गई।’ 

4 of 11
अनाम - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

कोरियोग्राफी का पहला ब्रेक 
‘मैं तब 19 साल का ही था। लोगों को मेरे काम में कुछ बात दिखने लगी थी। मैं कोशिश करता था कि दूसरों से कुछ अलग बना सकूं। मशहूर निर्माता निर्देशक के सी बोकाडिया के मामा विनोद एस चौधरी ने मुझे अपनी फिल्म ‘अनाम’ में पहला ब्रेक दिया। इस फिल्म के निर्देशक थे रमेश मोदी और फिल्म में अरमान कोहली और आयशा जुल्का लीड रोल में थे। इसे ही मैं हिंदी सिनेमा में अपना पहला ब्रेक कह सकता हूं।’

विज्ञापन

5 of 11
Aao Pyaar Karien - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

और, पहला हिट गाना 

‘के सी बोकाडिया ऐसे इंसान हैं जो किसी भी कलाकार का टैलेंट चुटकियों में पहचान लेते हैं। उन्होंने मेरा काम देखा हुआ था। उनके साथ मेरा मिलना जुलना भी काफी था उन दिनों। ईश्वर की मेहरबानी देखिए कि मेरा पहला हिट गाना 'हाथो में आ गया जो कल रुमाल आप का' भी के सी बोकाडिया की ही फिल्म 'आओ प्यार करें' का है। ये गाना सैफ अली खान और शिल्पा शेट्टी पर फिल्माया गया था। कुमार सानू ने इस गीत को गाया और इसके संगीतकार थे आदेश श्रीवास्तव।’

विज्ञापन

6 of 11
गोविंदा, गणेश आचार्य - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

गोविंदा से पहली मुलाकात 

‘कोरियोग्राफर के रूप में मेरी गाड़ी रफ्तार पकड़ चुकी थी लेकिन मेरी बहन का मानना था कि मुझे उस समय तेजी से अपनी पहचान बना रहे गोविंदा से मिलना चाहिए। अपनी बहन के कहने पर ही मैं गोविंदा से मिला। और, उनसे मिलने के बाद मेरी किस्मत चमक गई। गोविंदा ने ही मेरी मुलाकात निर्देशक डेविड धवन से कराई। डेविड धवन ने मुझे 'कुली नंबर वन' में मौका दिया। इस फिल्म में मेरा कोरियोग्राफ किया हुआ गाना 'गोरिया चुरा ना मेरा जिया' सुपर हिट हुआ। और, यही से मेरी और गोविंदा की जोड़ी सुपरहिट हो गई।’

विज्ञापन

7 of 11
Koi Jaye To Le Aaye - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
शोहरत के बाद फिर कैमरे के सामने
‘जैसा कि मैंने पहले ही बताया कि मेरे करियर की शुरुआत ही एक्टिंग से हुई। बचपन से शायद मुझे हीरो बनने का ही शौक था। और शायद इसीलिए जब निर्देशकराजकुमार संतोषी की फिल्म 'घातक' के गाने 'कोई जाए तो ले आए' में काम करने का मौका मिला तो मैं चहक गया। इस गाने में आप मेरे चेहरे के भाव देखकर बता सकते हैं कि मैंने इस गाने का कितना आनंद लिया है। ममता कुलकर्णी के साथ मेरा ये गाना काफी पसंद किया गया। और, इसके बाद तो निर्देशक खुद मुझे अपने गाने में कैमरे के सामने रहने के लिए कहने लगे।’

8 of 11
बीड़ी जलइले जिगर से पिया - फोटो : अमर उजाला अर्काइव, मुंबई
फिल्मफेयर ने दिया पहला आशीर्वाद
‘आप देखेंगे तो मैंने अपने करियर में एक के बाद एक हिट गानों की कोरियोग्राफी की है। मेरा ध्यान हमेशा अपने काम पर रहा और मेरा मानना है कि आपका सच्चा काम ही आपको बुलंदियों तक ले जा सकता है। लेकिन, काम की तारीफ भी हो तो हौसला चार गुना और बढ़ जाता है। विशाल भारद्वाज की फिल्म 'ओंकारा' के लिए पहली बार 2007 में मुझे बेस्ट कोरियोग्राफी का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। ये अवार्ड लेकर मैं घर आया तो पूरी रात सो नहीं पाया। मैं पूरी रात अपने पिताजी को याद करता रहा। जिस गाने के लिए मुझे इस फिल्म में अवार्ड मिला, वह गाना था 'बीड़ी जलइले जिगर से पिया'।’

9 of 11
स्वामी फिल्म, मनोज बाजपेयी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

निर्देश के रूप में पहली फिल्म

‘तमाम फिल्मों में कोरियोग्राफी करते करते मुझे भी कहानी की समझ आने लगी थी। मैंने जिंदगी को इतने करीब से देखा है कि मुझे लगता है कि हर कहानी का संघर्ष अपने आप में निराला है। ऐसी ही एक कहानी जब मुझे मिली तो मैंने खुद निर्देशक बनने का फैसला किया। मैं हमेशा शुक्रगुजार रहूंगा अभिनेता मनोज बाजपेयी का, जो इस फिल्म के हीरो बने। और, जूही चावला ने जो इस फिल्म को बनाने में मेरी मदद इस फिल्म की हीरोइन बनकर की, वह भी मेरी जीवन भर की अमानत है। ये फिल्म थी 'स्वामी' और ये 2007 में रिलीज हुई थी।’

10 of 11
'मस्तों का झुंड'  - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 

‘फिल्म ‘ओंकारा’ में पहला फिल्मफेयर पुरस्कार मिलने से पहले और बाद में मुझे देश दुनिया में तमाम इनाम इकराम मिले। लेकिन, जिस पुरस्कार की मुझे दिल से तमन्ना रही, वह था राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार। और, इस पुरस्कार को सीने से लगाने का मेरा सपना ईश्वर ने पूरा किया निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' में। इस फिल्म के गाने 'मस्तों का झुंड' के लिए मुझे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।’

विज्ञापन

11 of 11
Dehati Disco - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

और, अब बतौर हीरो पहली फिल्म 

‘अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि मेरा जीवन किसी रोलर कोस्टर की राइड से कम नहीं रहा है। लेकिन, वह कहते हैं ना कि पहला सपना इंसान कभी भूलता नहीं है तो बचपन से ही मैंने बड़े परदे पर हीरो बनने का जो सपना देखा था, वह अब पूरा हो रहा है फिल्म 'देहाती डिस्को' से। मेरा ये पक्का यकीन रहा है कि अगर हम दिल से कोई चीज मांगते हैं तो ऊपरवाला उसे पूरा करने के सारे जतन जरूर रहता है। निर्देशक मनोज शर्मा की इस फिल्म मे यही होने जा रहा है। ये फिल्म वाकई मेरे दिल के बहुत करीब है। अक्षय कुमार ने इस फिल्म के प्रचार के लिए जो किया है, वह आज के जमाने में कम हीरो ही करते हैं। उनका ये एहसान मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगा।’

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें