आज की आवाज
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
‘आज की आवाज’ और रवि के साज
आज के बाइस्कोप का खेल शुरू करने से पहले थोड़ा इससे पहले वाला खेल रवि के साथ और खेल लेते हैं। रवि अब हमारे बीच तो नहीं है लेकिन 3 मार्च 1926 को दिल्ली में जन्मे रवि ने संगीत की बिना कोई तालीम लिए फिल्म इंडस्ट्री में जो कारनामे किए हैं, वह सिर्फ ईश्वर का चमत्कार ही माने जा सकते हैं। अब तो खैर मुंबई में मलाड का इलाका पूरी तरह से मुख्य शहर का हिस्सा सा ही बन गया है लेकिन आज से सत्तर साल पहले जब रवि बंबई आए तो कहीं ठिकाना ना होने की वजह से मलाड रेलवे स्टेशन पर ही रातें बिताया करते थे। फिल्म ‘आनंदमठ’ में कोरस सिंगर से अपनी शुरूआत करने वाले रवि को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में गायक हेमंत कुमार ने सबसे पहला सहारा दिया। और तिनके का सहारा पाकर रवि ने जो संगीत का दरिया पार किया, उसमें ‘चौदवीं का चांद’, ‘दो बदन’, ‘हमराज’, ‘आंखें’, ‘घराना’, ‘खानदान’ और ‘निकाह’ जैसी फिल्में उनकी शोहरत की खेवैया बनीं। ‘वक्त’, ‘नीलकमल’, ‘गुमराह’ और ‘आज की आवाज’ संगीतकार रवि की कुछ और बेहतरीन फिल्में रही हैं। आशा भोसले के करियर को एक नया आकार देने में रवि का बहुत बड़ा हाथ है और गायक महेंद्र कपूर को अगर हिंदी सिनेमा में शोहरत मिली तो इसके पीछे संगीतकार रवि का बहुत बड़ा हाथ है। आगे बढ़ने से पहले चलिए महेंद्र कपूर की आवाज में फिल्म ‘आज की आवाज’ की ये बेहतरीन गजल सुन लेते हैं..
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