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Kesari Chapter 2: कहानी से लेकर क्लाइमैक्स तक, पढ़िए अक्षय कुमार की फिल्म की पांच खूबियां और पांच कमियां

सार

Kesari Chapter 2 Review: ‘केसरी चैप्टर 2’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। जलियांवाला बाग हत्याकांड की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म का लोगों को लंबे समय से इंतजार था। सी शंकरन नायर द्वारा लड़े गए ऐतिहासिक केस को दिखाती इस फिल्म में क्या पॉजिटिव है और क्या नेगेटिव है यहां पढ़ें:
 
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केसरी 2 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘केसरी चैप्टर 2’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। जलियांवाला बाग हत्याकांड की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में अक्षय कुमार ने सी शंकरन नायर, माधवन ने नेविल मैककिनले और अनन्या पांडे ने दिलरीत सिंह की भूमिका निभाई है। फिल्म का दर्शकों को लंबे समय से इंतजार था, जो अब खत्म हो चुका है। यहां पढ़िए ‘केसरी 2’ के पांच पॉजिटिव और पांच नेगेटिव प्वाइंट्स:
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केसरी 2 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अक्षय कुमार का किरदार
जैसा की अक्षय कुमार ने अनुरोध किया था कि फिल्म के शुरुआती दस मिनट बिल्कुल भी मिस ना करें, वाकई शुरू के दस मिनट देखने चाहिए। ताकि आपको आजादी के मोल की सनद रहे। बात अक्षय कुमार के किरदार सी शंकरन नायर की करें तो उनकी एंट्री शेरलॉक होम्स की तरह होती है, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है। वह भारतीय होते जाते हैं। क्लाइमेक्स आते-आते तो पूरी तरह से हो जाते हैं। इसके लिए उनकी तारीफ बनती है। असाधारण कहानी को कहती ये साधारण सी फिल्म बहुत सरलता से आगे बढ़ती है। पर बोर आपको बिल्कुल भी नहीं करेगी।
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केसरी 2 - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब
आर माधवन का अभिनय
आर माधवन ने नेविल मैककिनले के किरदार को बखूबी निभाया है। वह आपको इस किरदार से नफरत करने की पूरी वजह देंगे। सेकेंड हॉफ में जब उनकी एंट्री होती है तो कोर्ट रूम का माहौल बदल जाएगा। यकीनन फिल्म में उनकी एंट्री के बाद आपकी दिलचस्पी बढ़ेगी। माधवन के अलावा अनन्या पांडे और कृष राव के अभिनय की भी तारीफ होनी चाहिए। हालांकि, कम स्क्रीन टाइम के बावजूद भी कृष राव का किरदार अनन्या पर भारी पड़ता है। 

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केसरी 2 - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब
चुस्त-दुरुस्त किरदार
फिल्म के निर्देशक करण सिंह त्यागी की तारीफ करनी पड़ेगी। उन्होंने सभी किरदारों को बिल्कुल सही जगह पर फिट किया है। कब, कहां और किसको कैसे उपयोग में लाना है, इसके लिए वह पूरे नंबरों के हकदार हैं। खासकर कृष राव (परगट सिंह के किरदार में) का उपयोग करते हुए उन्होंने इमोशन बनाने का शानदार काम किया है। 
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केसरी 2 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कहानी
फिल्म की कहानी को काफी सावधानी से बुना गया है और स्क्रीनप्ले भी बड़े आराम से आगे बढ़ता है। पहले 10 मिनट के बाद बीच में जरा सी फिल्म उछाल लेती दिखेगी, लेकिन जल्द ही यह खुद को संभाल लेती है। यह काफी बारीक जंप है। बाकी पूरी फिल्म में आप कहीं नहीं अटकेंगे। यह बड़ी ही सरलता से आग बढ़ती है।
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केसरी 2 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
क्लाइमैक्स
जैसा की कहा जाता है कि किसी भी फिल्म की जान क्लाइमेक्स होता है। तो समझ लीजिए कि क्लाइमैक्स इस फिल्म की जान है। पूरे फिल्म में जो दर्द, गुस्सा इकट्ठा हुआ है वो क्लाइमैक्स में बहुत ही आराम से निकाल दिया गया है। सबसे जरूरी बात अक्षय कुमार ने गाली क्यों दी? इस सवाल का जवाब भी आपको क्लाइमैक्स में ही मिलेगा।

फिल्म किन प्वाइंट्स पर कमजोर पड़ी यह देख लेते हैं:
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केसरी 2 - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब
अंग्रेजी में डायलॉग
फिल्म में एक चीज जो आम दर्शकों को परेशान कर सकती है वह है अंग्रेजी में संवाद। जो फिल्म भारतीयों के लिए बनी है, अगर उसके डायलॉग की पहुंच कम अंग्रेजी समझने वाले वर्ग तक नहीं पहुंच पाती है, तो यह ठीक नहीं है। यह और भी अटपटा तब लगने लगता है जब एक सीन में अंग्रेजी बार में मसाबा गुप्ता का हिंदी गाना बजता है, जबकि वहां सभी अंग्रेज अफसर इकट्ठा होते हैं। फिल्म में ब्रिटिश दौर का टच देने के लिए अंग्रेजी संवादों को उपयोग करने की मजबूरी समझी जा सकती है, लेकिन कम से कम हिंदी में सबटाइटल तो देना ही चाहिए था।

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केसरी 2 - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब
तालियां बजाने वाले डायलॉग की कमी
फिल्म में बेशक कुछ अच्छे डायलॉग हैं, लेकिन आपको कोई ऐसा डायलॉग मिले, जिसपर आप खड़े होकर ताली बजा सकें तो ये थोड़ा मुश्किल है। फिल्म में इसकी कमी खलेगी।

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केसरी 2 - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब
गाने
‘ओ शेरा’ गाने को छोड़ दिया जाए तो फिल्म में कोई ऐसा गीत नहीं है, जो आपको भावुक करे या आप उसे गुनगुनाते हुए थिएटर से बाहर निकलें। यह फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी मानी जा सकती है। कभी-कभी फिल्म में जो काम डायलॉग और सीन नहीं कर पाते वो अच्छे गाने कर जाते हैं। कुछ पंजाबी में गीत हैं, पर वह हिंदी दर्शकों को कितना समझ में आएंगे ये तो दर्शक ही जानें।

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केसरी 2 - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब
पहले दस मिनट के बाद का जंप
शुरू में हमने फिल्म में आए जिस जंप की बात की थी, वह यह है कि जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद देशभर में जो अंग्रेजों के खिलाफ गुस्सा भरा था, जिसके दबाव में आकर जनरल डायर के खिलाफ कमिशन गठित किया गया। उसे अगर फिल्म में दिखाया गया होता तो शायद इमोशन के स्तर पर यह और कारगर होता और सी शंकरन नायर के द्वारा लड़े केस की अहमियत को वैसा ही दिखा पाती जितना की उसकी अहमियत है।
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केसरी 2 - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब
इमोशन
फिल्म में इमोशन को और गहरा किया जा सकता था। कहीं-कहीं पर यह फ्लैट सी हो जाती है। उदाहरण के तौर पर एक सीन में अंग्रेज जलियांवाला बाग हत्याकांड में अपनी जान गंवाने वालों के परिवार वालों को 25 रुपये का मुआवजा देते हैं। यहां पर इमोशन की कमी नजर आई।
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