सादा कपड़ों में पुलिसकर्मी व
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बब्बू त्यागी की हत्या के बाद दोनों गिरोह में घमासान तेज हो गया। त्यागी गैंग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सतवीर गैंग से मिल गया और तेजपाल उसके विरोधी महेंद्र फौजी गैंग से जा मिला। तेजपाल ने इस दौरान बब्बू हत्याकांड के कई गवाहों को ठिकाने लगा दिया। वह हवलदार महेंद्र त्यागी की हत्या की योजना बनाने लगा क्योंकि घायल गवाह के साक्ष्य पर उसे सजा होनी तय थी।
अप्रैल 1992 के अंतिम सप्ताह में तेजपाल ने अपने गुर्गे को पुलिस लाइन मेरठ में महेंद्र त्यागी से मिलने भेजा, जिसने अपने को रविंद्र त्यागी, ग्राम छपरौला के रूप में परिचय दिया और कहा कि आप त्यागी बिरादरी के बड़े प्रभावशाली व्यक्ति हैं। आप चाहोगे तो मेरी जवान बहन का रिश्ता तय हो जाएगा। उसने बहन का बायोडाटा फोटो के साथ उन्हें दे दिया। महेंद्र बोले कि वह तो पूर्णतया अपाहिज हो गए हैं कोई मिलने आता है तो बात चलाता हूं। रविंद्र 10 दिन बाद आने का वादा करके चला गया। मई के दूसरे हफ्ते में वह फिर से पहुंचा।
चाय पानी के बाद महेंद्र ने पड़ोसी सिपाही सेवक राम त्यागी के बेटे को परिवार सहित बुला लिया। लड़के को देखते ही उसने कहा कि अपनी बहन के लिए जैसा रिश्ता चाह रहा था, वैसा मुझे मिल गया। उसने कहा कि वह परिवार में बात करके एक हफ्ते में आएगा और लड़की दिखाने आप लोगों को गाजियाबाद लेकर जाएगा।