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अरब, खरब, नील, पद्म, शंख में कितने होते हैं शून्य? जानें भारतीय अंक प्रणाली

Sat, 11 Jan 2020 12:37 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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ज्यादातर लोग एक ही संख्या के लिए अलग-अलग शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय इकाइयां बेहद अलग हैं। भारतीय संख्याओं के अनुसार 100 को सौ बोलते हैं। लेकिन 1,000 को 'हजार' के रूप में जाना जाता है न कि 'दस सौ' के रूप में। अंतरराष्ट्रीय इकाइयों के मामले में यह समान नहीं है। भारतीय इकाई और अंतरराष्ट्रीय इकाई एक दूसरे से अलग-अलग हैं। 10,000 यानी दस हजार तक तो दोनों ये समान हैं। लेकिन इसके बाद संख्या वही रहती है, पर दोनों के नाम बदल जाते हैं। भारतीय अंक प्रणाली के अनुसार अरब, खरब, नील, पद्म ,शंख आदि में कितने शून्य होते हैं? अंतरराष्ट्रीय इकाइयों के अनुसार इनके क्या है नाम? इन सब सवालों के जवाब मिलेंगे यहां। पढ़ते हैं आगे...
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अंको में जितने शून्य बढ़ते हैं उतना ही उसका मान बढ़ता जाता है। सबसे पहले बात करते हैं उस समय की जब शून्य का अविष्कार नहीं हुआ था। ये वो समय है जब गणित बिना शून्य के चलती थी।
शून्य का अविष्कार - 
  • अगर शून्य के जन्म की बात करें तो सन् 498 में इसका अविष्कार माना जाता है।
  • किसी भी तरह का निर्माण शून्य अर्थात कार्य गणित के बिना होना मुश्किल है। जबकि इससे पहले 2560 ईसा पूर्व में मिस्र के लोगों ने मशहूर पिरामिड बनाया था।
  • वहीं, चीन की दीवार भी 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में ही बननी शुरू हो गई थी।शून्य के बिना जोड़-घटाव के लिए एबैकस का प्रयोग होता था।
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कैसे होता था एबैकस का प्रयोग-
  • बता दें कि जीरो की खोज से पहले ही ग्रीक के लोग जीरो के बारे में जानते थे पर वे लोग इसे एक अंक नहीं मानते थे।
  • द गार्जियन में छपी रिपोर्ट में George Auckland और Martin Gorst ने बताया कि इस वक्त बिना अंकों के रोमन में जोड़-घटाव होता था।
  • बता दें कि वे एबैकस या फ्रेम का प्रयोग करते थे। उस वक्त जीरो की जगह पर डॉट का यूज करते थे। बाद में डॉट की जगह शून्य नेे ले ली थी।

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- फोटो : amar ujala
देवनागरी, अंतरराष्ट्रीय, संस्कृत भाषा में अंक - 
देवनागरी संख्या अन्तरराष्ट्रीय संख्या संस्कृत में संख्या
0 शून्य
1 एक
2 द्वि
3 त्रि
4 चतुर्
5 पंच
6 षट्
7 सप्त
8 अष्ट
9 नव
 

भारतीय अंक प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय अंक प्रणाली में अंतर :

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भारतीय अंक प्रणाली संख्या अंतरराष्ट्रीय अंक प्रणाली
इकाई 1 यूनिट(unit)
दहाई 10 दस(ten)
सैकड़ा 100 सौ(hundred)
हजार 1,000 हजार(thousand)
दस हजार 10,000 दस हजार (ten thousand)
लाख 1,00,000 एक लाख (one lakh)
दस लाख 10,00,000 मिलियन(million)
करोड़ 1,00,00,000 दस मिलियन (ten million)
दस करोड़ 10,00,00,000 सौ मिलियन (hundred million)
अरब 1,00,00,00,000 बिलियन (billion)
दस अरब 10,000,000,000 दस बिलियन (ten billion)
खरब 1,00,00,00,00,000 सौ बिलियन (hundred billion)
दस खरब 1,000,000,000,000 ट्रिलियन (trillion)
नील 1,00,00,00,00,00,000 दस ट्रिलियन(ten trillion)
दस नील 100,000,000,000,000 सौ ट्रिलियन (hundred trillion)
पद्म 1,00,00,00,00,00,00,000 क्वॉड्रिलियन (quadrillion)
दस पद्म   10,000,000,000,000,000  दस क्वॉड्रिलियन (ten quadrillion)
शंख 1,00,00,00,00,00,00,00,000 सौ क्वॉड्रिलयन (hundred quadrillion)


नोट- इसके अलावा महाशंख या अल्द या उपाध, अंक या महाउपाध, जल्द, माध, परार्ध, अंत, महा अंत, शिष्ट, सिंघर, महा सिंघर, अदंत सिंघर आदि भी भारतीय अंक प्रणाली का हिस्सा हैं।
 

अंतर को याद रखने के लिए सरल सूत्र है - 

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  • 1 लाख = 100 हजार = यानी 1 के बाद 5 शून्य = 100,000
  • 10 लाख = 1 मिलियन = 1 के बाद 6 शून्य = 1,000,000
  • इसी तरह, 1 करोड़ = 10 मिलियन = 1 के बाद 7 शून्य = 10,000,000
  • दूसरे शब्दों में, यह कहा जा सकता है कि एक हजार को एक हजार से गुणा किया जाता है, यह दस लाख बनाता है।
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