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Louis Braille: तीन की उम्र में दृष्टि खोई, 16 की उम्र में बना दी नई भाषा लेकिन मौत के 16 साल बाद मिली पहचान

Wed, 04 Jan 2023 04:53 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

World Braille Day 2023 Who Was Louis Braille? लुई ब्रेल के सम्मान में 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा चार जनवरी को हर साल विश्व ब्रेल दिवस मनाने का फैसला किया गया। 
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Louis Braille (लुई ब्रेल) - फोटो : UNGA
World Braille Day 2023: बीते पांच सालों प्रति वर्ष 04 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाता है। यह दिन लुई ब्रेल की स्मृति में मनाया जाता है। लुई ब्रेल, वही शख्स है, जिसे आज दुनियाभर के दृष्टिबाधित लोग मसीहा मानते हैं। लुई ब्रेल का जन्म चार जनवरी, 1809 को फ्रांस में हुआ था। उन्होंने ब्रेल लिपि का आविष्कार किया था। ब्रेल एक ऐसी भाषा है जिसे दृष्टिबाधित लोग पढ़ने और लिखने के लिए इस्तेमाल में लेते हैं। हालांकि, जीते जी तो ब्रेल के काम को उचित सम्मान नहीं मिला, लेकिन मरणोपरांत उनके काम को तवज्जो मिली। लुई ब्रेल के सम्मान में 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा चार जनवरी को हर साल विश्व ब्रेल दिवस मनाने का फैसला किया गया। विश्व ब्रेल दिवस पहली बार 04 जनवरी, 2019 को मनाया गया था। आइए जानते हैं लुई ब्रेल के बारे में...  
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लुई ब्रेल ने हादसे में खो दी थी दृष्टि

लुई ब्रेल ने एक दुर्घटना में अपनी दृष्टि खो दी थी। वे तीन साल के थे। अपनी दृष्टिहीनता के बावजूद, ब्रेल ने अकादमिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और एक छात्रवृत्ति पर रॉयल इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड यूथ चले गए। वहां पढ़ाई के दौरान ब्रेल ने दृष्टि बाधित लोगों की पढ़ने और लिखने में मदद के लिए एक स्पर्श कोड विकसित किया। इस बीच,  लुई ब्रेल की मुलाकात सेना के कैप्टन चार्ल्स बार्बियर से हुई, जिन्होंने सेना के लिए एक विशेष क्रिप्टोग्राफी लिपि का विकास किया था, जिसकी मदद से सैनिक रात के अंधेरे में भी संदेशों को पढ़ सकते हैं। बाद में, ब्रेल ने कैप्टन बार्बियर की सैन्य क्रिप्टोग्राफी से प्रेरित एक नई विधि का निर्माण किया। तब उनकी उम्र करीब 16 वर्ष थी। 

 

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12 बिंदुओं पर आधारित थी लिपि, 1829 में हुई प्रकाशित

लुई ब्रेल द्वारा तैयार की गई यह कूट लिपि 12 बिंदुओं पर आधारित थी। 12 बिंदुओं को 66 की पंक्तियों में रखा जाता था। हालांकि, तब इसमें विराम, संख्या और गणितीय चिन्ह मौजूद नहीं थे। लुई ब्रेल ने बाद में 12 की जगह 06 बिंदुओं का उपयोग कर 64 अक्षर और चिह्न जोड़े, जिनमें उन्होंने विराम चिन्ह, संख्या, बढ़ और संगीत के नोटेशन लिखने के लिए भी जरूरी चिह्न उपलब्ध कराए थे। ब्रेल ने लिपि को 1824-25 में पहली बार सार्वजनिक तौर पर प्रस्तुत किया। इसके बाद, 1829 में पहली बार ब्रेल लिपि प्रणाली प्रकाशित की।

 

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विश्व ब्रेल दिवस - फोटो : social media

मौत के 16 साल बाद मिली ब्रेल लिपि को मान्यता

छह जनवरी, 1852 को लुई ब्रेल का निधन हो गया। तब वे 43 वर्ष के थे। उनकी मृत्यु के 16 वर्ष बाद वर्ष 1868 में ब्रेल लिपि को प्रामाणिक रूप से मान्यता मिली। यह भाषा आज भी दुनियाभर में मान्य है। भारत सरकार ने 04 जनवरी, 2009 को जब लुई ब्रेल के जन्म को 200 वर्ष पूर्ण हुए थे, तब भारत में इनके सम्मान में इनका डाक टिकट भी जारी किया था। 

यह भी पढ़ें : जानिए क्या होती है ब्रेल लिपि?
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