अमर उजाला
Wed, 4 January 2023
ब्रेल एक ऐसी भाषा है जिसका उपयोग दृष्टिबाधित लोग पढ़ने और लिखने के लिए करते हैं।
पहले ब्रेल लिपि 12 बिंदुओं पर आधारित होती थी। 12 बिंदुओं को 66 की पंक्तियों में रखा जाता था। लुई ने 12 की जगह 06 बिंदुओं का उपयोग कर 64 अक्षर और चिह्न का आविष्कार किया था।
विश्व ब्रेल दिवस पहली बार 04 जनवरी, 2019 को मनाया गया था। इसे लुई ब्रेल की जयंती के तौर पर मनाते हैं।
लुई ब्रेल ने एक दुर्घटना में तीन साल की उम्र में अपनी दृष्टि खो दी थी।
43 वर्ष की आयु में 06 जनवरी 1852 को लुई ब्रेल का निधन हो गया। मृत्यु के 16 वर्ष बाद 1868 में ब्रेल लिपि को प्रामाणिक रूप से मान्यता मिली।
भारत सरकार ने 2009 में लुई ब्रेल की 200वीं जयंती पर उनके सम्मान में डाक टिकट और दो रुपये का सिक्का जारी किया था।
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